'तेलंगाना पर गंभीर नहीं केंद्र सरकार'

'तेलंगाना पर केंद्र गंभीर नहीं'

उमर फ़ारूक़

बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने कहा है कि केंद्र सरकार तेलंगाना को अलग राज्य बनाने के मुद्दे पर गंभीर नहीं है. सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता एम कोटेश्वर राव यानी किशनजी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तेलंगाना की जनता धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य उसी स्थिति में मिल सकता है जब तेलंगाना की जनता अपना आंदोलन जारी रखे, उसमें तेज़ी लाए और सरकार पर दबाव बनाए रखे. उन्होंने आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र की जनता से कहा है कि वे वहाँ के स्वार्थी राजनेताओं के धोखे में न आएँ और तेलंगाना का समर्थन करें.

मजबूरी

अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की गृह मंत्री पी चिदंबरम की घोषणा को उन्होंने मजबूरी में उठाया गया क़दम बताया. किशनजी ने कहा, "केंद्र सरकार ने मजबूरी में ही ये वादा किया है क्योंकि हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे थे. मैं समझता हूँ कि तेलंगाना राष्ट्र समिति से ज़्यादा छात्रों के आंदोलन ने केंद्र सरकार को ये वादा करने पर विवश किया है."

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर राव मजबूरी में ही आमरण अनशन पर बैठे थे क्योंकि उनकी पार्टी काफ़ी कमज़ोर हो गई थी और उसने अपना जनाधार गँवा दिया था. किशन जी के मुताबिक़ आंध्र और रायलसीमा के सांसदों से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जल्दबाज़ी में कोई क़दम नहीं उठाया जाएगा, इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार फिर एक बार तेलंगाना की जनता को उसी तरह धोखा देना चाहती है, जैसा 1952 से लेकर अब तक दिया जाता रहा है.

समर्थन

माओवादी भी अलग तेलंगाना राज्य की मांग का समर्थन करते हैं. ये पूछे जाने पर कि माओवादी ऐसा क्यों कर रहे हैं, उन्होंने कहा, "हम केवल इसलिए तेलंगाना नहीं चाहते कि छोटे राज्य होने चाहिए, बल्कि हम जनता की आशाओं और आकांक्षाओं के अनुसार तेलंगाना चाहते हैं."

उन्होंने कहा कि पूरे देश में हर वो राज्य स्थापित होना चाहिए जो वहाँ की जनता चाहती है. माओवादी पश्चिमी बंगाल में गोरखालैंड का भी पूरा समर्थन करते हैं. हालाँकि किशनजी ने स्पष्ट किया कि केवल छोटे राज्य बनने से कोई फ़ायदा नहीं, छत्तीसगढ़ और झारखंड को देखिए वहाँ कांग्रेस हो या भाजपा या कोई भी दल सब जनता विरोधी नीतियों पर चल रहे हैं.

आंध्र प्रदेश में जारी संकट को उन्होंने राजनेताओं का ड्रामा बताया और कहा कि आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के आम लोगों का कोई समर्थन प्राप्त नहीं है. किशनजी ने कहा कि इस गड़बड़ में केवल राजनेता नहीं हैं, बल्कि पूँजी निवेशक, व्यापारी और उद्योगपति हैं जिन्होंने अपना पैसा हैदराबाद में लगा रखा है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और प्रणब मुखर्जी ये तीनों बहुत ही चतुर राजनेता हैं और अपनी चतुरता से तेलंगाना वालों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं.

आपत्ति

किशन जी ने कहा, "अगर उन्हें अपनी गंभीरता सिद्ध करनी है तो उन्हें तेलंगाना की स्थापना की प्रक्रिया एक वर्ष के अंदर पूरी कर लेनी चाहिए और उनसे ऐसा करवाने के लिए पूरे तेलंगानावादियों को मिलकर आंदोलन जारी रखना पड़ेगा."

उन्होंने कहा कि सीपीआई माओवादी भी अपना आंदोलन जारी रखेगी और ये बात आपत्तिजनक है कि केंद्र सरकार केवल टीआरएस के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव को बातचीत के लिए आमंत्रित करके मामले को वहीं ख़त्म करना चाहती है.

उन्होंने मांग की कि सरकार उन सब संगठनों को बातचीत के लिए बुलाए जो तेलंगाना की लड़ाई में शामिल रहे हैं. वरना तेलंगाना का वही हाल होगा, जो महाराष्ट्र में विदर्भ राज्य की मांग पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद भी उसका हुआ है. विधानसभा में केवल प्रस्ताव पारित करने से तेलंगना बनने वाला नहीं है.

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