बाल सिपाहियों को मुक्त कराने के लिए प्रतिनिधि भेजेगा संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून की बाल एवं सशस्त्र संघर्ष के लिए विशेष प्रतिनिधि राधिका कुमारास्वामी सोमवार को चार दिवसीय काठमांडू यात्रा पर यहां आएंगी। वह यहां माओवादियों की 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' (पीएलए) के करीब 3,000 लड़ाकुओं की मुक्ति सुनिश्चित कराने की कोशिश करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने 2007 में माओवादियों की सेना के प्रमाणीकरण के दौरान पाया था कि पीएलए में भर्ती किए गए इन लोगों की उम्र बहुत कम है।

यद्यपि नेपाल की तत्कालीन गठबंधन सरकार और माओवादी इस बात पर सहमत हो गए थे कि प्रमाणीकरण के तुरंत बाद पीएलए बैरकों से बच्चों को मुक्त कर दिया जाएगा। पर दो साल बाद भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा बच्चों की रिहाई के लिए बार-बार फोन किए जाने पर भी बाल सिपाहियों को बैरकों से बाहर जाने की इजाजत नहीं है।

ठीक एक साल पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कुमारास्वामी ने नेपाल की यात्रा की थी। पर सत्तारूढ़ दल और पूर्व छापामारों द्वारा जल्दी ही बच्चों को रिहा करने के वादे के बावजूद उनकी यात्रा कुछ खास नहीं कर सकी थी।

माओवादी बैरकों की निगरानी कर रहे 'नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के मिशन' (यूएनएमआईएन) ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि अपनी यात्रा के दौरान कुमारास्वामी को न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक बाल मजदूरों की रिहाई के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना पर हस्ताक्षर की गवाह बनने की उम्मीद है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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