हैदराबाद ही होगा तेलंगाना की राजधानी : राव (लीड-1)
राव ने समाचार चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हैदराबाद को चंडीगढ़ की तर्ज पर दो राज्यों की संयुक्त राजधानी नहीं बनाया जा सकता है।
राव ने कहा, "हैदराबाद की तुलना चंडीगढ़ से नहीं की जा सकती। यह कोई नया विभाजन नहीं है। तेलंगाना राज्य पहले से मौजूद था और उसकी राजधानी हैदाराबाद ही थी, जबकि आंध्र प्रदेश की राजधानी कुरनूल था।"
राव ने कहा कि भौगोलिक रूप से हैदराबाद तेलंगाना में है। उन्होंने सवाल किया, "आंध्र के लोग भला हैदराबाद पर दावा कैसे कर सकते हैं। इसका कोई मतलब होता है क्या?"
राव ने यह भी कहा कि हैदराबाद में रह रहे अन्य क्षेत्रों के लोग पृथक तेलंगाना राज्य बनने के बाद भी यहां शांतिपूर्वक रह सकते हैं। उन्होंने कहा, "जब भारत के दूसरे हिस्सों के लोग हैदराबाद में रह सकते हैं तो फिर आंध्र के क्यों नहीं रह सकते?"
राव ने कहा कि अलग तेलंगाना राज्य की मांग से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के विरोध में अन्य क्षेत्रों में जारी विरोध प्र्दशन कुछ स्वार्थी तत्वों द्वार खड़ा किया गया है और प्रायोजित है। ये वे स्वार्थी तत्व हैं, जिन्होंने वहां पूंजी निवेश किया है और अनधिकृत रूप से हैदराबाद में भूमि हड़प रखी है।
राव ने आगे कहा कि पृथक तेलंगाना राज्य के लिए राज्य विधानसभा में कोई प्रस्ताव पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह में पूर्ण भरोसा है। राज्य के गठन के लिए वे आवश्यक कदम जरूर उठाएंगे।
राव ने कहा कि उन्हें बातचीत के लिए नई दिल्ली बुलाया गया है।
राव ने कहा, "उन्होंने मुझे बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया है। मैंने कहा है कि मैं एक सप्ताह या 10 दिनों बाद ही आ सकता हूं। मैं फिलहाल अपने घर से बाहर निकल पाने की स्थिति में नहीं हूं।"
पृथक राज्य की मांग को लेकर कई दिनों तक आमरण अनशन पर बैठने वाले टीआरएस प्रमुख ने आरोप लगाया कि तेलंगाना क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का आंध्र के लोग 'दोहन' कर रहे हैं।
राव ने कहा, "आखिरकार हमारे लोगों को रोजगार के लिए खाड़ी देशों में जाना पड़ता है। तेलंगाना की व्यथा यह है कि इस क्षेत्र के 35,000 लोग खाड़ी देशों की जेलों में बंद हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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