पंचायत ने विवाह में बैंड-बाजों पर पाबंदी लगाई

पंचायत ने कहा कि फैसले का विरोध करने वाले लोगों को सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा। मुजफ्फरनगर के शामली इलाके के राजोवाला गांव में शुक्रवार रात 'अंसारी समाज' की पंचायत में यह फैसला लिया गया। पंचायत में कैराना और तितरो सहित करीब 20 गावों के लोगों ने हिस्सा लिया।

पंचायत के सदस्य याकूब अंसारी ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, " इस फैसले के पीछे हमारी सोच शादियों में पैसे के दुरुपयोग को रोकना है। ऐसा करने से हम पैसों का बेवजह खर्च रोककर जरूरतमंदों की मदद कर सकते हैं।"

अंसारी ने कहा कि समुदाय के जो लोग इस फैसले का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ सजा के तौर पर पंचायत द्वारा तय किया गया आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। साथ ही उन्हें गांव से निकाल भी जा सकता है।

पंचायत ने अपने फैसले को जायज बताते हुए कहा कि इससे गरीब मां-बाप को सहायता मिलेगी क्योंकि हालात से बेबस मां-बाप पैसा न होते भी अपनी इज्जत बचाने के लिए कर्ज लेकर बच्चों की शादियों में खर्च करते हैं।

उधर, लखनऊ में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने पंचायत के फैसले का आंशिक रूप से समर्थन किया है। सुन्नी धर्मगुरू और प्राचीन ईदगाह मस्जिद के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने आईएएनएस से कहा, "शादियों में बैंड-बाजे का इस्तेमाल ध्वनि प्रदूषण के लिहाज से गलत है। इस फिजूलखर्जी को कौम के गरीब लोगों की मदद में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।" साथ ही फिरंगी महली ने पंचायत द्वारा सामाजिक बहिष्कार करने के फैसले पर ऐतरात जताते हुए कहा कि किसी का सामाजिक बहिष्कार करना उचित नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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