उद्योग जगत को हैदराबाद के भविष्य की चिंता नहीं (लीड-1)
हैदराबाद, 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। हैदराबाद प्रस्तावित तेलंगाना राज्य की राजधानी बने या फिर केंद्र शासित क्षेत्र, यहां के व्यापारिक समुदाय और उद्योग जगत को इसकी परवाह नहीं है।
वैसे व्यापार और उद्योग जगत हैदराबाद, तेलंगाना क्षेत्र और रायलसीमा के अन्य हिस्सों में जारी हिसा और बंद से चिंतित है। प्रस्तावित तेलंगाना राज्य के गठन पर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया बेहद सामान्य है।
व्यापार और उद्योग जगत का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति, राजनीतिक स्थायित्व और अच्छे आधारभूत ढांचे का इच्छुक है।
आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और दवा कंपनियों के केंद्र हैदराबाद को लेकर तेलंगाना और आंध्र क्षेत्र में मतभेद हैं।
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना हैदराबाद के प्रस्तावित तेलंगाना राज्य को स्वीकार नहीं किया जाएगा क्योंकि यह शहर पिछले 400 वर्षो से क्षेत्र की राजधानी रहा है। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश के बंटवारे का विरोध करने वाले अलग तेलंगाना राज्य के गठन की स्थिति में हैदराबाद के लिए संघ शासित क्षेत्र का दर्जा चाहते हैं।
तटीय आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के उद्योगों ने वर्ष 1956 में आंध्र राज्य में तेलंगाना के विलय के बाद से हैदराबाद में भारी निवेश किया है। आंध्र राज्य की राजधानी उससे पहले कुरनूल थी।
आंध्र प्रदेश उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष हरिश चंद्र प्रसाद ने आईएएनएस से कहा कि क्षेत्र में जारी हिंसा से उद्योग जगत चिंतित है। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी हिंसक आंदोलन से चिंतित हैं।
प्रसाद ने कहा, "हम राजनीति पर प्रतिक्रिया देना नहीं चाहते, लेकिन इस मुद्दे का जल्द हल चाहते हैं। यदि यह जल्दी ही सुलझा लिया जाता है तो व्यापार और निवेश पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन यदि यह एक या दो वर्षो तक चलता रहेगा तो इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।"
उल्लेखनीय है कि गत एक दशक में हैदराबाद का काफी तेजी से विकास हुआ है। यहां सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की 1000 से अधिक राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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