मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कराने का यंत्र बनी पोलियो ड्रॉप्स
सहरसा (बिहार), 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। सहरसा की 26 वर्षीय बीना देवी महीनों से राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही थीं बाद में अपनी इस जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने पोलियो ड्रॉप्स को अपना हथियार बनाया।
बिहार को पोलियो मुक्त राज्य बनाने के लिए सरकार 'पोलियो उन्मूलन' कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। सरकार के इन कार्यक्रमों की गंभीरता समझते हुए बीना ने तय किया कि जब तक उनकी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी नहीं होंगी तब तक वह अपने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स नहीं पिलाने देंगी।
बीना ने आईएएनएस से कहा, "मैंने इस साल मार्च में राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था लेकिन सभी आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद अधिकारियों ने राशन कार्ड नहीं बनाया। मैं बहुत गरीब हूं और मुझे पांच बच्चों का पेट भरना है, इसलिए नवंबर की शुरुआत में मैंने अधिकारियों को बताया कि जब तक मुझे राशन कार्ड नहीं मिलेगा तब तक मैं अपने तीन छोटे बच्चों का पोलियो टीकाकरण नहीं कराऊंगी।"
बीना को तब बहुत आश्चर्य हुआ जब अधिकारियों को अपना फैसला सुनाने के दिन ही वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल उनके दरवाजे पर पहुंचा और उन्होंने बीना से कहा कि वह अपने बच्चों का टीकाकरण होने दें, इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें राशन कार्ड मिल जाएगा।
मुस्कुराती हुई बीना कहती हैं, "एक सप्ताह के अंदर ही मुझे राशन कार्ड मिल गया था।"
'नेशनल पोलियो सर्विलैंस प्रोजेक्ट' (एनपीएसपी) के मुताबिक उन्हें बच्चों के टीकाकरण से लोगों के इंकार की रिपोर्ट लगातार मिल रही हैं।
एनपीएसपी के क्षेत्रीय दल के नेतृत्वकर्ता हेमंत शुक्ला कहते हैं, "विधवा पेंशन या घर के राशन, इंदिरा आवास योजना के तहत मिलने वाले मकानों और अन्य सरकारी योजनाओं की मांग पूरी कराने के लिए लोग टीकाकरण कराने से मना कर रहे हैं।"
सहरसा के मुरली गांव के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के संयोजक भगवान चौधरी का कहना है कि कुछ लोगों ने अंतिम चरण में पोलियो टीकाकरण कराने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि लोग अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कराने के लिए टीकाकरण से इंकार कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि सहरसा जिला राज्य में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस साल यहां पोलियो के 22 नए मामले सामने आए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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