ग़ज़ा पट्टी पर स्टील की दीवार

यह दीवार जब बनकर तैयार हो जाएगी तो इसकी लंबाई 10-11 किलोमीटर होगी और यह 18 फ़ुट ज़मीन के नीचे भी होगी. लोहे की इस दीवार को पूरी तरह बनकर तैयार होने में 18 महीने का समय लगेगा.
अमरीकी मदद
इस काम में अमरीकी सेना के इंजीनियर मिस्र की मदद कर रहे हैं. बीबीसी को ये भी जानकारी मिली है कि दीवार की डिज़ाइन भी उन्होंने ही तैयार की है. इस योजना को काफ़ी गोपनीय रखा गया है. इस पर मिस्र का कोई भी अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं है.
स्थानीय किसानों ने सीमा पर पिछले कुछ हफ़्तों में कुछ बढ़ी हुई गतिविधियाँ देखीं. वहाँ पेड़ों को काट दिया गया था. बहुत कम लोगों को ही पता था कि वहाँ अवरोधक बनाया जा रहा है. ऐसा इसिलए था क्योंकि दीवार काफ़ी मज़बूत स्टील से बनाई जा रही है जिसे ज़मीन में काफ़ी नीचे दबा कर रखा गया है. बीबीसी के मुताबिक़ यह स्टील अमरीका में बना हुआ है और बमरोधी है.
अभेद्य दीवार
स्टील की इस दीवार को न तो काटा जा सकता है और न ही गलाया जा सकता है, अगर दूसरी तरह कहें तो यह अभेद्य है. सूत्रों के मुताबिक़ दीवार रफ़ा चौराहे से चार किमी उत्तर की तरफ़ बनकर तैयार है और अब दक्षिण की तरफ़ काम शुरू हो गया है.
ग़ज़ा और मिस्र के बीच की यह ज़मीन गड्ढ़ों और सुरंगों के कारण काफ़ी खोखली हो चुकी है. इनका प्रयोग फ़लस्तीनी अपनी रोज़मर्रा की चीजों की तस्करी के लिए करते हैं. लेकिन इज़राइल का कहना है कि इन सुरंगों का लोग, हथियारों और उसके दक्षिणी क़स्बों पर दागे जाने वाले रॉकेटों के पूर्जों की तस्करी में भी किया जाता है.
ऐसी उम्मीद है कि यह दीवार तस्करी रोकने में सफल तो नहीं होगी लेकिन फ़लस्तिनियों को सैकड़ों और गहरी सुरंगे खोदने के लिए प्रेरित ज़रूर करेगी.












Click it and Unblock the Notifications