भारत-रूस के बीच असैन्य परमाणु और रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर (राउंडअप)
मास्को, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने सोमवार को एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह समझौता परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाएगा। दोनों नेताओं ने क्रेमलिन में आयोजित बातचीत के बाद इस परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते से रूस द्वारा भारत को परमाणु ईंधन की अबाध आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।
शीत युद्ध के दोनों सहयोगियों के बीच हुआ यह समझौता उनके रणनीतिक संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है, जो तीन सैन्य समझौतों और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापार बढ़ाने को लेकर हुए दो अन्य समझौतों के जरिए और मजबूत हुआ है।
एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "यह एक व्यापक परमाणु समझौता है। यह इस्तेमाल परमाणु ईंधन के पुनशरेधन की अनुमति प्रदान करता है और इसमें यह भी शामिल है कि संबंधों में किसी तरह की खटास आने के बाद भी ईंधन की आपूर्ति जारी रहेगी।"
मनमोहन सिंह ने क्रेमलिन के मालाचिते हाल में संवाददाताओं से कहा, "हमने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किया है जिससे हमारे सहयोग का दायरा शोध और विकास के क्षेत्रों के लिए और परमाणु ऊर्जा के सभी क्षेत्रों के लिए परमाणु रिएक्टरों की आपूर्ति से आगे बढ़ गया है।"
मनमोहन सिंह ने कहा कि समझौते में तमिलनाडु के कुदनकुलम में चार और परमाणु रिएक्टरों का निर्माण भी शामिल होगा। रूस यहां पहले से ही एक परमाणु विद्युत केंद्र का निर्माण कर रहा है।
सिंह ने कहा, "भारत-रूस के बीच परमाणु ऊर्जा में सहयोग को बढ़ाने के संकेत के रूप में चार नई इकाइयां देश में आएंगी। इसके अतिरिक्त हमने पश्चिम बंगाल में एक अतिरिक्त स्थल की पहचान की है।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने कई सारे मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत संपन्न करने के बाद एक जैसे विचार व्यक्त किए।
मनमोहन सिंह ने कहा, "वैश्विक मुद्दों पर हमारे विचार एक हैं और हमारा सहयोग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हो सकता है।"
मेदवेदेव ने भी ठीक इसी तरह के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, "हम परमाणु सदस्य क्लब में विस्तार नहीं चाहते, लेकिन असैन्य परमाणु सहयोग के लिए हम इच्छुक हैं।"
मेदवेदेव ने कहा, "कुदनकुलम में सहयोग का हमारा अनुभव अच्छा रहा है और हम दूसरे स्थल पर भी संयुक्त रूप से काम करने के बारे में सोच रहे हैं।"
मेदवेदेव ने आतंकवाद में बढ़ोतरी पर भी चिंता जाहिर की।
मेदवेदेव ने कहा, "भारत-रूस के सामने एक जैसी चुनौतियां हैं। हमें अपने आतंक निरोधी आधार को मजबूत करना चाहिए। हम आतंक निरोधी गतिविधियों में ठोस मदद मुहैया कराएंगे।"
प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह ने कहा है भारत और रूस का रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण है और इस रिश्ते की कीमत पर अन्य देशों के साथ रिश्ता मंजूर नहीं होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, "किसी भी तीसरे देश के साथ हमारा रिश्ता रूस-भारत रिश्ते की कीमत पर कायम नहीं होगा। रूस भारत का विश्वसनीय मित्र रहा है और भारत इस रिश्ते को उच्च प्राथमिकता देता है।" उन्होंने कहा कि भारत-रूस रिश्ता आर्थिक सुधार, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रीय एवं वैश्विक मसलों के लिहाज से प्रभावशाली असर छोड़ने की क्षमता रखता है।
मेदवेदेव ने कहा कि द्विपक्षीय रिश्ता लगातार प्रगाढ़ होता जा रहा है और इसका व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। इस साल द्विपक्षीय व्यापार में 8 फीसदी का इजाफा होना इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा, "रिश्ते के मोर्चे पर हम अच्छा काम कर रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने विस्तारित असैन्य परमाणु समझौते एवं तीन रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर के लिए रूसी नेता के साथ आज मुलाकात की। यह समझौता भारत को इस्तेमाल हो चुके रूसी परमाणु ईंधन के पुन:प्रसंस्करण की छूट देगा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत को मिली ऐसी छूट यह साबित करता है कि इस समझौते का दायरा भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के दायरे से भी व्यापक है।
10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है भारत-रूस व्यापार :
रूसी संसद क्रेमलिन का कहना है कि रूस और भारत के बीच वार्षिक व्यापार अगले वर्ष 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक क्रेमलिन की ओर से रविवार को कहा गया, "जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों के बावजूद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में इजाफा हुआ है। वर्ष 2010 के आखिर तक इसे 10 अरब डॉलर तक करने का है और इस लक्ष्य को पाया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications