विदेशी फलों की पैदावार को बढ़ावा दे रहा है हिमाचल प्रदेश
बरागटा ने आईएएनएस से कहा, "हम आड़ू, नाशपाती, बेर, पहाड़ी बादाम और अखरोट की नई और बेहतर किस्मों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन किस्मों की न केवल अच्छी पैदावार सुनिश्चित होगी बल्कि यह उत्पादकों के लिए भी लाभदायक होंगी।"
उन्होंने कहा, "कुछ इलाकों में, खासकर मध्य पहाड़ी इलाकों में ठंडे दिनों की कमी होने की वजह से सेब की फसल प्रभावित हो जाती है। इसलिए हम किसानों से सेब की जगह पर आड़ू, नाशपाती और बेर लगाने के लिए कह रहे हैं।"
स्विट्जरलैंड, हॉलैंड, अमेरिका और चीन से फलों की नई किस्में मंगाई गई हैं।
उन्होंने कहा, "सरकार निचली और मध्यम पहाड़ियों में अंगूर की फसल को भी बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। आयातित किस्में बिलासपुर, सिरमौर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।"
हिमाचल प्रदेश में फलों की करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित अर्थव्यवस्था है। शिमला, कुल्लू, मंडी, लाहौल व स्पीति, किन्नूर और चंबा जिलों में फलों की पैदावार अधिक होती है।
यह प्रदेश, देश का एक प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र है। जहां करीब 200,000 परिवार सेब उत्पादन के क्षेत्र में काम करते हैं।
सेब के अलावा नाशपाती, आड़ू, चेरी, खुबानी, कीवी, स्ट्रॉबेरी, जैतून, बादाम और बेर यहां की अन्य प्रमुख व्यावसायिक फसलें हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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