कश्मीरः कई और गुमनाम कब्रें
एक मानवाधिकार संगठन का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में कई और गुमनाम क़ब्रों का पता चला है. भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार और न्याय मामलों से जुडे़ एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन इंटरनेशनल पीपुल्स ट्राइब्यूनल ऑन ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस ने दो हज़ार सात सौ क़ब्रों की सूची तैयार की है.
इनमें से कुछ सामूहिक क़ब्रों में तीन से पांच शव थे.अधिकतर शव गुमनाम लोगों के हैं. 'बरीड एविडेंस' यानि छिपे साक्ष्य नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक ये सामूहिक क़ब्रें बारामूला, कुपवाडा़ और बांदीपुरा घाटी में मिली हैं. संगठन ने पिछले साल भी उरी में एक हज़ार क़ब्रों का पता लगाया था.
संगठन ने उन पचास लोगों के मामलों की पड़ताल की जो विदेशी आतंकवादी के नाम पर सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए थे. रिपोर्ट का कहना है कि इनमें से 47 आम लोग थे जो फर्जी़ मुठभेड़ों में मारे गए. संगठन की संयोजक डॉ. अंगना चटर्जी कहती हैं कि जिन 50 मामलों की उन्होंने पड़ताल की उनमें से 47 आम आदमी थे न कि विदेशी आतंकवादी.
डॉ. चटर्जी का ये भी कहना है कि हो सकता है कि इन क़ब्रों में उन 8,000 लोगों के शव हों जो पिछले 20 सालों के दौरान सेना के साथ संघर्ष में लापता हो गए. संगठन की मांग है कि पुलिस को उन लोगों के तस्वीरें जारी करनी चाहिए जिन्हें दफ़नाया गया ताकि लोगों के परिजन ये जान पाएँ कि उन गुमशुदा लोगों की कतार में कहीं उनके लोग तो नहीं हैं और उनका अंतिम संस्कार किया भी गया कि नहीं.












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