तेल मंत्रालय के हलफनामे को खारिज कराना चाहती है आरएनआरएल (लीड-1)
आरएनआरएल के वकील राम जेठमलानी ने प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी.सुदर्शन रेड्डी और पी.सथशिवम की खंडपीठ के सामने कहा, "सभी ने मिलकर पहाड़ खोदा लेकिन निकली एक चुहिया।"
आरएनआरएल और मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के बीच गैस विवाद की सुनवाई कर रही पीठ से जेठमलानी ने कहा, "हलफनामे का मूल्य कागज के टुकड़े से अधिक नहीं है। इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।"
इससे पहले आरएनआरएल ने कहा कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन से निकाली जा रही गैस केवल दादरी परियोजना के लिए नहीं है और इस बारे में आम गलतफहमी को दूर किया जाना चाहिए।
आरएनआरएल के वकील मुकुल रोहतगी ने पारिवारिक समझौते का हवाला देते हुए कहा, "मुकेश अंबानी के समूह द्वारा अनिल अंबानी के समूह को आपूर्ति की जाने वाली गैस का अनिल अंबानी की कंपनी के साथ व्यापार करने के अलावा किसी और के साथ व्यापार नहीं किया जा सकता।"
रोहतगी ने अंबानी बंधुओं के बीच मां कोकिला बेन द्वारा करवाए गए समझौते का हवाला देते हुए कहा, "गैस के आंतरिक व्यापार की अनुमति है।"
वकील ने कहा कि पारिवारिक समझौते के मुताबिक मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल से अनिल की कंपनी आरएनआरएल को आपूर्ति की गई गैस के आंतरिक व्यापार या अदला-बदली की अनुमति है।
उन्होंने कहा, "समझौते के तहत गैस की आपूर्ति अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की सभी कंपनियों को करनी है न कि केवल दादरी परियोजना के लिए।"
रोहतगी ने कहा, "यदि दादरी परियोजना पर किसी कारणवश क्रियान्वयन नहीं होता है तो समूह अपनी किसी अन्य परियोजना के लिए गैस का इस्तेमाल कर सकती है।" उन्होंने यह भी कहा, "गैस की आपूर्ति का दायित्व केवल दादरी परियोजना तक सीमित नहीं है बल्कि यह समूह की सभी बिजली परियोजनाओं के लिए है।"
सर्वोच्च न्यायालय में इन दिनों आंध्र प्रदेश के कृष्णा गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस की कीमत और मात्रा को लेकर अंबानी बंधुओं के बीच विवाद की सुनवाई हो रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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