यूरोपीय संघ के सुधार 8 वर्ष बाद लागू
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार संधि का उद्देश्य ईयू को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। परंतु यह संधि यूरोपीय संघ के मतदाताओं में लोकप्रिय नहीं हुई। इसके विरोधियों ने ईयू को एक 'सुपर स्टेट' बनाने का आरोप लगाया।
ईयू के अध्यक्ष जोस मैनुएल बारोस ने एक बयान में कहा कि लिस्बन संधि ईयू की योजनाओं के केंद्र में नागरिकों को रखती है।
इस संधि से ईयू के मूल नियमों में बदलाव होगा। वैश्विक मंच पर ईयू को और अधिक प्रभावशली बनाने के लिए संधि में एक राष्ट्रपति और विदेश नीति निदेशक के पद बनाने का प्रस्ताव है।
ईयू के नेताओं ने 19 नवंबर को शिखर सम्मेलन में बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री हरमैन वान रॉम्पी को राष्ट्रपति चुना। मंगलवार देर शाम उनकी नियुक्ति को स्थाई किए जाने की संभावना है। रॉम्पी के एक जनवरी का पद ग्रहण करने की संभावना है।
ब्रिटेन की बैरोनेस कैथेरीन एश्टॉन को सर्वसम्मति से ईयू का विदेश नीति निदेशक और यूरोपीय आयोग का उपाध्यक्ष चुना गया।
एश्टॉन ने मंगलवार को पद ग्रहण किया लेकिन आयोग के अन्य सदस्यों की तरह यूरोपीय संसद से उनकी नियुक्ति की पुष्टि होगी।
नई संधि से ईयू के नागरिक एकजुट होकर हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से नए कानूनों की मांग कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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