'दूर की जाएंगी अग्नि-द्वितीय की खामियां'

एंटनी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, "यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बार परीक्षण विफल हो जाते हैं।" उनसे पूछा गया था कि यह विफलता देश के एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम के लिए आघात है।
वैज्ञानिक देखेंगे समस्याएं
एंटनी ने कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)के वैज्ञानिक इस समस्या को देखेंगे और दूर कर देंगे।"
गत 23 नवंबर को हुआ अग्नि-द्वितीय का प्रथम रात्रि परीक्षण विफल हो गया था। सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को उड़ीसा के व्हीलर द्वीप से प्रक्षेपित किया गया था। इससे पहले इसी साल के आरंभ में अग्नि-द्वितीय का दिन के समय हुआ परीक्षण भी विफल रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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