रॉम्पुई यूरोपीय संघ के अध्यक्ष बने

एश्टन अभी ईयू की व्यापार आयुक्त हैं. इस पद का सृजन लिस्बन समझौते से हुआ था. इन दोनों नेताओं की छवि सर्वसम्मति के आधार पर फ़ैसला करने वाले नेताओं की है. हालांकि इन्हें विदेश नीति का अनुभव कुछ ख़ास नहीं है. ब्रुसेल्स में हुई शिखर बैठक में ईयू के सभी 27 नेताओं ने सर्व सहमति से रॉम्पुई और एश्टन के नाम पर मुहर लगाई.
इससे पहले ब्रिटने ने स्पष्ट कर दिया था कि वह पूर्व प्रधानमंत्री टोन ब्लेयर को ईयू का अध्यक्ष बनाए जाने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं कर रहा है. रॉम्पुई को फ़्रांस और जर्मनी से ज़ोरदार समर्थन मिला. उन्हें गठबंधन चलाने का अनुभव प्राप्त है और प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी सरकार सफलतापूर्वक चलाई.
उनका कहना था, "एकता हमारी ताकत है लेकिन विविधता हमारी संपत्ति है और बातचीत में सभी देशों को तवज्जो मिलनी चाहिए." यूरोपीय संघ के अध्यक्ष यूरोपीय परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे जिसमें संघ के देशों की ओर से राजनीतिक फ़ैसले लिए जाते हैं.












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