अफ़गानिस्तान एक 'नाज़ुक मोड़' पर

करज़ई एक ऐसे चुनाव के बाद राष्ट्रपति घोषित किए गए हैं जिसमें काफ़ी धांधली के आरोप थे. उनपर पश्चिमी देशों की ओर से भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी ख़ासा दबाव है. पश्चिमी देशों के अधिकारियों को उम्मीद है कि करज़ई अपने उदघाटन भाषण में अफ़गानिस्तान में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताएंगे.
बृहस्पतिवार को होनेवाले शपथग्रहण समारोह के लिए हिलेरी क्लिंटन भारी सुरक्षा के बीच काबुल पहुंची हैं. हिलेरी क्लिंटन ने कहा, हम अफ़गानिस्तान की सरकार और अफ़गानिस्तान की जनता दोनों ही के साथ मज़बूत साझेदारी चाहते हैं और मैं हमेशा यही कहती हूं कि साझेदारी दोनों के साथ होगी—किसी एक के साथ नहीं.""
हिलेरी क्लिंटन के साथ यात्रा कर रहीं बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि शपथग्रहण के मौके पर हिलेरी की मौजूदगी एक तरह से करज़ई के नेतृत्व पर स्वीकृति की मुहर है. वहीं काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस का आकलन है कि पश्चिमी नेता करज़ई का इसलिए साथ दे रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है. उनका कहना है कि अगर वो साथ नहीं देते हैं तो स्थिति और बदतर हो जाएगी.
लेकिन दूसरी सच्चाई ये भी है कि अफ़गानिस्तान में मरनेवाले पश्चिमी देशों के सैनिकों की बढ़ती संख्या के साथ पश्चिमी नेताओं का रूख कड़ा हो रहा है. वो चाहते हैं कि करज़ई भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाएं. इन सबके बीच राष्ट्रपति ओबामा को फ़ैसला करना है कि अफ़गानिस्तान में और सैनिक भेजें या नहीं. उनके प्रशासन में ये सोच हावी हो रही है कि ज़्यादा सैनिकों के भेजने का भी कोई असर तबतक नहीं होगा जबतक अफ़गानिस्तान सरकार अपने शासन का दायरा पूरे देश में नहीं फैलाए.












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