मध्यपूर्व शांति प्रयासों को झटका

ये घोषणा ऐसे वक़्त मे आई है जब अमरीका, इसराइल और फ़लस्तीन के बीच शांति वार्ता फिर से शुरु कराने की कोशिश मे जुटा है.
इसराइल ने कहा है कि क़ब्जे़ वाले क्षेत्र पूर्वी यरुशलम के पास गीलो मे 900 रिहाईशी बस्तियां बनाई जाएगीं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के हिसाब से ये अवैध है. बीबीसी संवाददाता टिम फ़्रैंक्स का कहना है कि जब पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियों के निर्माण का सवाल आता है तो आमतौर पर इसराइली सरकार संयम की बात करती है.
लेकिन जब सवाल पूर्वी यरुशलम का उठता है तो इसरायल का रुख बिल्कुल अलग है. वो इस क्षेत्र को इसराइल की राजधानी का अटूट अंग मानता है. इसराइली गृह मंत्रालय की एक प्रवक्ता का कहना है कि इस इलाक़े मे अगले तीन चार साल से पहले निर्माण शुरु होने की कोई संभावना नही है.
अमरीका ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इसराइल सरकार के इस कदम से उसे निराशा हुई है. अमरीका ने एक बयान मे इसराइल के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है “एसे समय जब हम बातचीत फिर से शुरु कराने की कोशिश कर रहे हैं, इस तरह की कार्रवाई से हमारी कोशिशों के क़ामयाब होने मे मुश्किल होगी".
फ़लस्तीनी नेताओं ने कहा है की जब तक इसराइल क़ब्ज़े वाले क्षेत्र मे निर्माण बंद नही करता है वो बातचीत नही करेगें.उधर प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने पश्चिमी तट की यहूदी बस्तियों को खाली कराने की बात पर कुछ इसराइली सैनिकों के विरोध करने पर चिंता प्रकट की है. उनका कहना है की इस तरह के काम से पूरे देश की व्यवस्था चरमरा सकती है.
इसराइली सेना ने उन चार सैनिकों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की है जिन्होने पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियों को खाली कराने के ख़िलाफ़ विरोध का नेतृत्व किया था.












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