हूरों को पढ़ाया इस्लाम का पाठ

वहां मौजूद दो सौ सुंदरियों ने पाया कि उन्हें कॉकटेल की बजाए इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए उत्साहित किया जा रहा था. पता चला कि उनके मेज़बान लीबिया के नेता कर्नल मुआमर गद्दाफी हैं जो शहर में विश्व खाद्य सम्मलेन के सिलसिले में आए हुए थे.
उन्होंने इस्लाम के चमत्कार की बातें कीं और अपने मेहमानों को विश्वास दिलाया कि जैसा कि आलोचक बताते हैं, इस्लाम वैसा महिला विरोधी नहीं है. इन सुंदरियों के चुने जाने की प्रक्रिया कठोर थी और उनके मेहमान का परिचय एक रहस्य. लड़कियों के लिए चुने जाने का मानदंड था कि उन्हें सुन्दर होना होगा, उम्र 18 से 35 वर्ष और क़द 1.7 मीटर.
और कपड़े कैसे हों
इसके बारे में कड़े निर्देश थे- नीचे तक कटे हुए, यानि गहरे कटे हुए गलों के कपड़े की मनाही तो थी ही, छोटे स्कर्ट का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. तो इस तरह दो सौ महिलाएं इकठ्ठा हुईं, उनकी हाज़िरी ली गयी और फिर वो एक बस में सवार होकर इटली की राजधानी रोम के एक बड़े ही उच्च स्तरीय रिहायशी इलाके में ले जाई गयीं.
उनकी सुरक्षा जांच हुई और फिर उन्हें एक बड़े ही भव्य रिसेप्शन पर काफी देर के लिए छोड़ दिया गया. इंतज़ार इतना लंबा था की कइयों ने ये भी शिकायत की कि वहां पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं था. और एक घंटे के इंतज़ार के बाद आख़िरकार उनके मेज़बान का परिचय सामने आया.
कर्नल गद्दाफ़ी इस्लाम के फ़ायदे बताते रहे, और उन्होंने अपने मेहमानों को इस्लाम धर्म क़बूल करने के लिए उत्साहित किया. उन्हें ये बताने का ख़ासा प्रयत्न किया कि इस्लाम महिलाओं से घृणा नहीं करता. दो घंटे बाद, ये महिलाएं चली गयीं, थोड़ी हतप्रभ सी. उन्हें मेहमान बनने के लिए मिले पचास यूरो यानि लगभग चार हज़ार रूपए और साथ में क़ुरान की एक प्रति भी.












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