अफ़ग़ानिस्तान पर ब्राउन की योजना

प्रधानमंत्री ब्राउन ने संभावना ज़ाहिर की है कि अगले साल की शुरुआत में उन्होंने जो सम्मेलन बुलाया है उसमें यह टाइम टेबल तय हो सकेगा कि अफ़ग़ानिस्तान में प्रशासन किस तरह ज़िलेवार अफ़ग़ानों को सौंपा जाए. बीबीसी के राजनीतिक संवाददाता रॉब वाटसन का कहना है कि पिछले कुछ हफ़्तों में अफ़ग़ानिस्तान पर गॉर्डन ब्राउन की यह दूसरी बड़ी टिप्पणी है और इससे ब्रिटेन में अफ़ग़ानिस्तान के मामले में घटते जनसमर्थन पर सरकार की चिंता ज़ाहिर होती है.
अल-क़ायदा का डर
गॉर्डन ब्राउन ने अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश फ़ौजों की मौजूदगी को उचित ठहराया और दोहराया कि यह ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए भी ज़रुरी है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान से वापस आ जाएँगीं तो वहाँ तालेबान फिर से शक्तिशाली हो सकता है और इससे अल-क़ायदा को पश्चिमी देशों पर हमले की योजनाएँ बनाने के लिए फिर से ज़मीन मिल जाएगी.
लेकिन जिन लोगों को यह शंका है कि अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती का कोई अंत नहीं होने वाला है, उनके लिए भी प्रधानमंत्री ब्राउन ने साफ़ संकेत दिए.उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल से अफ़ग़ान ज़िलेवार ख़ुद नियंत्रण संभाल लेंगे.
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि 2010 के सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान के बारे में एक विस्तृत राजनीतिक खाका तैयार किया जाए जिसके तहत सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया जा सके."
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जनता की राय जानने के लिए किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि ज़्यादातर लोग मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान का युद्ध जीता नहीं जा सकता लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि क्या जनता नेताओं के इन तर्कों को भी सुन रही है?












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