'पासपोर्ट सेवा' परियोजना फिर विलंबित
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। तीन दिनों के भीतर पासपोर्ट उपलब्ध कराने की भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'पासपोर्ट सेवा' एक बार फिर 13 नवंबर की तय समय सीमा पर शुरू नहीं हो सकेगी।
यह तीसरी बार है जब विदेश मंत्रालय की ई-गवर्नेस में बड़ी पहल अपनी तय समय सीमा पर आरंभ नहीं होगी। अधिकारियों ने विलंब के लिए साफ्टवेयर की बाधाओं को दोषी ठहराया है।
बेंगलुरू से आरंभ होने वाली परियोजना के लिए पहले अंतिम समय सीमा जून में, फिर अक्टूबर में और बाद में 13 नवंबर तय की गई थी।
विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने 30 अक्टूबर को ट्विटर पर लिखा था कि कुछ तकनीकी बाधाओं के कारण होने वाली देरी के बाद अगले महीने परियोजना को शुरू किया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना के लिए आधारभूत ढांचा और भवन तैयार है। परंतु नई व्यवस्था पर आधारित साफ्टवेयर अभी भी बहुत समस्या पैदा कर रहा है।
अक्टूबर 2008 को हुए समझौते के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी को परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजना की लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
पासपोर्ट सेवा परियोजना कर्नाटक के बेंगलुरू, हुबली और मंगलोर के बाद पंजाब के चंडीगढ़, लुधियाना और हरियाणा के अंबाला में आरंभ होगी।
इस पायलट परियोजना के अलावा कर्नाटक के गुलबर्ग में एक छोटा केंद्र भी खोला जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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