प्रसव मृत्यु पर सम्मेलन

प्रसव मृत्यु पर सम्मेलन

दुनिया भर के देशों के स्वास्थ्य मंत्री इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में एक सम्मलेन कर रहे हैं. इस सम्मलेन में चर्चा का विषय हो रही है किस तरह से गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं की होनेवाली मृत्यु की स्थिति से निबटा जाए.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष इस सम्मलेन का आयोजन कर रहा है और उसका कहना है की गर्भावस्था और बच्चों के जन्म से जुडी समस्याएँ, विकासशील देशों में महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण हैं.

संस्था का कहना है कि यह विकसित देशों में भी एक बड़ी समस्या है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समस्या को 'मानवीय आपात स्थिति' बता रहा है.

सहस्त्राब्दी विकास के जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनमें प्रजनन के दौरान गर्भवती महिलाओं की मौत की दर को कम करना भी था लेकिन इस मामले में सबसे कम प्रगति हुई है.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का कहना है कि इसकी वजह राजनीतिक इच्छाशक्ति का कम होना है.

यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस सम्मेलन के अंत में इस समस्या के हल के लिए राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबद्धता ज़ाहिर की जाएगी.

अमरीका महिलाओं के स्वास्थ्य पर किसी अन्य देश की तुलना में ज़्यादा खर्च करता है लेकिन किसी और विकसित देश की तुलना में वहाँ किसी महिला की मौत की आशंका अधिक है.

गर्भावस्था के दौरान पैदा हुई दिक़्कतों की वजह से या प्रसव के दौरान हर साल अमरीका में पाँच सौ महिलाओं की मौत हो जाती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन मौतों को रोका जा सकता है.

बीबीसी संवाददाता लौरा त्रेवेलियन का कहना है कि एक तो सभी के लिए स्वास्थ्य बीमा न होना इसकी एक वजह हो सकती है. ग़रीबी, मोटापा और ऑपरेशन के ज़रिए प्रसव इसकी दूसरी वजहें हो सकती हैं.

एक श्वेत अमरीकी महिला की तुलना में किसी अफ़्रीकी अमरीकी महिला की मौत की आशंका तीन से चार गुना ज़्यादा होती है. शोधकर्ता इसकी वजह नहीं जानते.

अनुमान है कि रक्तचाप अधिक होना इसकी एक वजह हो सकती है.

लेकिन पाकिस्तान जैसे ग़रीब देश में प्रसव के दौरान हर साल मरने वाली महिलाओं की संख्या 30 हज़ार के क़रीब है.

बीबीसी की इस्लामाबाद संवाददाता का कहना है कि ज़्यादातर मौतें इसलिए भी होती हैं कि प्रसव अस्पताल की जगह घरों में ही होते हैं.

इसमें जब भी समस्या आती है तो इतनी देर हो चुकी होती है कि अस्पताल पहुँचने का समय ही नहीं होता.

वहाँ अस्पतालों में इलाज की सुविधा मुफ़्त है लेकिन दवाइ आदि के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है और भर्ती होने के लिए कतार अक्सर बहुत लंबी होती है.

समस्या यह है कि अभी भी बहुत सी महिलाएँ मानती हैं कि यह ईश्वर की इच्छा होती है कि कुछ महिलाएँ प्रसव के दौरान मौत का शिकार हो जाएँ, उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इनमें से बहुत सी मौतें रोकी जा सकती हैं.

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