भाईचारे का संदेश दे रहा है छठ पर्व
चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के इस पर्व के पहले दिन ' नहाय-खाय ' के साथ ही छठ पर्व शुरु हुआ। नसीमा ने आईएएनएस से कहा कि वह इस पर्व को तीन वर्ष से करते आ रही हैं।
उन्होंने कहा, "छठी मईया की कृपा से ही पुत्र की प्राप्ति हुई है। मैं नियमपूर्वक गंगा तट पर जाकर सूर्य को अघ्र्य दूंगी।"
इधर, रेशमा भी पहली बार छठ पर्व कर रही हैं। उन्होंने कहा, "इसमें हिन्दू-मुस्लिम वाली कोई बात नहीं है। श्रद्घा और विश्वास ही सही पूजा है। "
उल्लेखनीय है कि पटना में छठ में प्रसाद बनाने के लिए अधिकांश चूल्हे भी मुस्लिम परिवार द्वारा ही बनाए जाते हैं। मुस्लिम परिवार का कहना है कि आदमी को मिट्टी से शिक्षा लेनी चाहिए। दरअसल चूल्हे में लगने वाली मिट्टी किसी प्रकार के भेदभाव के शिकार नहीं होती।
लगातार 20 वषरें से छठ के लिए चूल्हा बेचने वाले मोहम्मद सलालुद्दीन का कहना है कि वह अन्य दिनों में बर्तन बेचने का काम करते हैं लेकिन छठ के मौके पर वह चूल्हे बनाने का काम करते हैं। छठ व्रती 'खरना' के दिन इन्हीं चूल्हों पर प्रसाद बनाया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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