विदेशी निवेश सौ अरब डॉलर के पार

वर्ष 2000 के बाद भारत में विदेशी निवेश सौ अरब डॉलर के आँकड़े को पार कर गया है. इसका 44 फ़ीसदी हिस्सा मॉरिशस के रास्ते आया है.
हालांकि चीन से तुलना करने पर ये आँकड़ा काफी कम है, फिर भी अर्थशास्त्री इसे भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेशकों के भरोसे का प्रतीक मान रहे हैं.
मॉरिशस में कंपनी बनाकर उसके रास्ते भारत में निवेश करने पर कर में छूट मिलती है, इसलिए भारत में निवेश की इच्छुक कंपनियाँ इसका सहारा लेती हैं.
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में विदेशी निवेश साढ़े दस अरब डॉलर रहा है.
सबसे ज़्यादा निवेश सिंगापुर, अमरीका, ब्रिटेन और नीदरलैंड से आता है.
विश्व अर्थव्यवस्था के मंदी से निकलने और भारतीय अर्थव्यवस्था की गति तेज़ होने के बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और बढ़ने की संभावना है.
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी का कहना है, "भारत में शुरू में ज़्यादा विदेशी निवेश नहीं आया लेकिन अब यह बढ़ने की संभावना है. जैसे-जैसे दूसरे देश मंदी से उबरेंगे वैसे-वैसे भारत में निवेश बढ़ेगा."
उद्योग और वाणिज्य महासंघ फिक्की के महासचिव अमित मित्रा कहते हैं कि विदेशी निवेश से न सिर्फ़ पैसा बल्कि नई तकनीकें और प्रबंधन क्षमताएँ भी बढ़ती हैं.












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