सांस लेने का तरीका बदलकर दमे से लड़ा जा सकता है

वाशिंगटन, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। ऐसे में जब स्वास्थ्य विशेषज्ञ इलाज पर होने वाले भारी भरकम खर्च में कटौती एवं बेहतर इलाज नतीजे के तरीके ढूंढ़ने में लगे हैं, डलास स्थित सॉदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी के दो प्राफेसरों ने दावा किया है कि सांस लेने का तरीका बदलकर दमे से मुकाबला किया जा सकता है।

संस्थान के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर थॉमस रिट्ज एवं एलिसिया म्यूरेट ने दमा रोगियों के लिए चार सप्ताह का एक अभ्यास कार्यक्रम तैयार किया है जिसमें बेहतर श्वसन अनुशासन पर जोर दिया गया है। दोनों का दावा है कि सांस के आरोह-अवरोह के तरीकों में सुधार लाकर दमे से लड़ा जा सकता है। ऐसी स्थिति में दवा पर मरीज की निर्भरता कम हो जाती है।

इस शोध के लिए 14 लाख डालर का अनुदान हासिल करने वाले थॉमस एवं एलिसिया डलास काउंटी के 120 दमा रोगियों पर चार सप्ताह के श्वसन नियंत्रण अभ्यास कार्यक्रम को आजमाने वाले हैं। शोध जुलाई 2011 में पूरा हो जाएगा। अमेरिका में 2.2 करोड़ से अधिक लोग दमे के मरीज हैं और ये रोगी सामूहिक रूप से अपने इलाज पर सालाना 19 अरब डालर खर्च करते हैं।

"स्ट्रेस, एंग्जाइटी एंड क्रॉनिक डिजीज रिसर्च प्रोग्राम" नामक इस कार्यक्रम के तहत कैपनोमेट्री-एसिस्टेड रेस्पायरेटरी ट्रेनिंग(कार्ट) प्रविधि विकसित की है। कैपनोमेट्री नामक यंत्र सांस में कार्बन डायऑक्साइड के अनुपात का पता लगाता है। इस यंत्र की मदद से मरीज नियमित रूप से मंद गति से सांस लेने का अभ्यस्त हो सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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