सबूत नहीं होती खुफिया जानकारी: चिदंबरम

गुरुवार को मीडिया द्वारा इशरत के मामले पर सवाल पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा, "हलफनामे में क्या बुराई है? मेरी जानकारी के अनुसार हलफनामे में कहा गया है कि गुजरात सरकार को खुफिया जानकारियां दी गई थीं।"
सबूत नहीं होती खुफिया जानकारी
चिदंबरम ने कहा कि हलफनामे को 'संदर्भ' के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि खुफिया जानकारियां सबूत नहीं होतीं। ये महज जानकारियां होती हैं जिन्हें नियमित रूप से सरकारों के साथ बांटा जाता है। यह प्रमाण या निर्णायक सबूत नहीं होतीं। इनसे आगे की जांच में मदद मिलती है।"
उल्लेखनीय है कि 15 जून 2004 को अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने महाविद्यालय की छात्रा इशरत, उसके दोस्त प्रणेश पिल्लई ऊर्फ जावेद शेख, अमजद अली राणा और जीशान जोहर को कथित मुठभेड़ मार गिराया था। पुलिस का कहना था कि ये सभी लश्कर ए तैयबा के सदस्य थे और उनकी योजना मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने की थी।
अगवा किया गया इशरत व उसके साथियों को
अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एस.पी.तमांग ने सोमवार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस और उन चारों के बीच गोलीबारी नहीं हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि चारों छात्र थे और 12 जून 2004 को उन्हें मुंबई से अगवा किया गया था और दो दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
चिदंबरम ने कहा, "मेरा मानना है कि हलफनामे का कुछ ज्यादा ही अर्थ निकाला जा रहा है। इसे यदि गुजरात सरकार के बचाव के रूप में देखा जा रहा है तो मुझे गुजरात सरकार और उसके प्रशासन पर बहुत अफसोस है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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