नेपालः दोबारा शपथ नहीं लेंगे उपराष्ट्रपति

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काठमांडू। हिंदी में शपथ लेने के कारण विवादों में घिरे नेपाल के उपराष्ट्रपति परमानंद झा ने नेपाली भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ लेने से इंकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने झा को रविवार तक दोबारा शपथ लेने का आदेश दिया था। नेपाली भाषा में शपथ लेने के मसले पर झा ने कहा, "मैं इस मुद्दे पर उसी समय बात करूंगा जब सरकार संविधान बना लेगी और नेपाल में बोली जाने वाली सभी भाषाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित करेगी।"

झा ने कहा, "जब शपथ ली जाती है तो भाषा का नहीं बल्कि राष्ट्र और जनता के कल्याण को महत्व दिया जाता है। राष्ट्रीयता विचार से आती है, भाषा से नहीं। भाषा, नस्ल, धर्म और संस्कृति बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। सभी भाषा, धर्म और नस्लें पूरक होने चाहिए।"
झा ने संकेत दिया कि वह लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं, जबकि उनके वकील मंगलवार से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। पूर्व न्यायाधीश झा ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पिछले सप्ताह दो याचिकाएं दायर की थी।

इससे पहले रविवार सुबह मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया था कि झा रविवार को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए नेपाली भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ लेनी चाहिए। बैठक के बाद नेपाली सरकार के प्रवक्ता और सूचना मंत्री शंकर पोखरेल ने कहा था कि स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें झा फिर से शपथ लेंगे।

दूसरी भाषाओं का अपमान

झा ने कहा, "मैंने 13 माह पूर्व हिंदी में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं हुआ है कि इतने लंबे अंतराल के बाद किसी से फिर से शपथ लेने के लिए कहा गया हो।" झा ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने मुझे फिर से शपथ लेने का आदेश देकर उन लोगों का अपमान किया है, जिनकी मातृभाषा नेपाली नहीं है।"

झा ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के असंवैधानिक आदेश का पालन कर अपने पद को बचाना मेरे लिए बहुत आसान है।" लेकिन उन्होंने कहा कि यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाला है। झा ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर चुप्पी साध कर इस तरह के संविधान विरोधी फैसले का समर्थन कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ तराई क्षेत्र में 48 घंटे बंद का आह्वान किया गया है। काठमांडू में भी झा के पक्ष में प्रदर्शन हो रहे हैं। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

राष्ट्रपति की अपील

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने गत रविवार को आदेश दिया था कि झा एक हफ्ते के अंदर नेपाली भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ लें अन्यथा उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। ऐसा भी कहा जा रहा था कि झा को हिंदी के स्थान पर अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेनी चाहिए। नेपाल में नेपाली भाषा के बाद मैथिली सबसे अधिक बोली जाती है। राष्ट्रपति रामबरन यादव और सरकार के मंत्रियों ने पहले भी झा से अपील की थी कि वह फिर से नेपाली में पद की शपथ लें।

दक्षिण नेपाल के तराई इलाके से ताल्लुक रखने वाले झा ने जुलाई 2008 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। शपथ ग्रहण समारोह में वह धोती और कुर्ता पहनकर पहुंचे थे, जबकि इसे नेपाली पोशाक नहीं माना जाता। झा के शपथ लेने के अगले ही दिन एक वकील ने उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वैसे नेपाल में हिदी फिल्मों का बड़ा बाजार है और लोग भी हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं लेकिन इसे आधिकारिक भाषा नहीं माना जाता है।

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