यूपी में बाढ़ के बाद संक्रामक रोग फैले

बाढ़ प्रभावित जिलों में संक्रामक रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई दलों के साथ-साथ चिकित्सकों के सचल दलों की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रतिदिन स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय (लखनऊ) को रिपोर्ट भेजकर हालात से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चिकिस्तकों का दल मौके पर पहुंचा
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी समीर वर्मा ने शुक्रवार को बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 45 चिकित्सा दलों के अलावा सचल दल भी काम कर रहे हैं। इन दलों के चिकित्सकों ने बीते चार-पांच दिनों में करीब 2,000 लोगों की जांच कर उपचार किया।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में जलभराव है वहां कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। जिले में शारदा और नेपाल से बहने वाली सोहाली और मोहाना नदियों में जलस्तर बढ़ जाने के कारण 300 गांव जलमग्न है, जिससे करीब 2 लाख लोग बेघर हो गए हैं।
24 घंटे चिकित्सा सेवा
बहराइच के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे चिकित्सकों को उपलब्ध रहने को कहा गया है। पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए उन्हें भी टीके लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बहराइच में 350 गांवों में पानी भरी हुआ है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में घाघरा सहित अन्य नदियों के उफान पर आने से सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, गोरखपुर, बाराबंकी, गोंडा, देवरिया और फैजाबाद जिलों के करीब 3000 गांव बाढ़ से जलमग्न हो गए हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। कुल 13 जिलों की 38 तहसीलों की करीब 10 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। साढ़े चार लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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