'महिलाओं को साक्षर और जागरूक भी बनाना होगा'
उनका यह भी कहना है कि राज्य में 50 फीसदी आरक्षण पहले से ही लागू है इसलिए इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
महिलाओं का मानना है कि इस फैसले के जमीन पर उतर जाने के बाद महिलाओं को ग्राम पंचायतों में भागीदारी मिल सकेगी।
कुछ महिलाओं का यह भी कहना है कि बिहार में इसका कुछ प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि बिहार में पहले से ही ग्राम पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।
पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भारती एस़ कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार के इस फैसले के लागू हो जाने से महिलाओं में नई जागृति आएगी तथा ग्रामीण महिलाओं में अपने अधिकार के प्रति जागरूकता भी आएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केन्द्र सरकार आगे लाने का प्रयास कर रही है जो सराहनीय कदम है।
पटना उच्च न्यायालय की अधिवक्ता श्रुति सिंह का मानना है कि इस फैसले से बिहार में इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां वर्ष 2006 के ग्राम पंचायत चुनाव से ही महिलाओं को 50 प्रतिशत सीटें सुरक्षित कर दी गई थी।
सिंह हालांकि कहती हैं कि केवल महिलाओं को आरक्षण मिलने से ही कुछ नहीं होगा। महिलाओं को खुद अपने अधिकार के प्रति सजग रहना होगा।
पटना की जानीमानी चिकित्सक शांति राय की राय अलग है। उनका कहना है कि सरकार को सबसे पहले महिलाओं को जागरूक करना होगा। उनका कहना है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों की कितनी महिलाएं साक्षर हैं। हालांकि वे यह भी कहती हैं कि सरकार का ऐसा फैसला स्वागतयोग्य है।
पटना मेडिकल कॉलेज की तृतीय वर्ष की छात्रा सोनाली का कहना है कि सरकार का यह फैसला महिलाओं के लिए उत्साहवद्र्घक है परंतु सरकार को यह भी देखना होगा कि महिला के मुखिया चुने जाने के बाद महिला ही काम कर रही हैं या उसके बदले कोई और काम कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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