सर्वोच्च न्यायालय का समलैंगिकों से जुड़े निर्णय पर रोक से इंकार
दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के पक्ष और विपक्ष में दायर याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति पी.सतशिवम ने यह निर्णय दिया।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो जुलाई को वयस्कों में सहमति के आधार पर बने समलैंगिक संबंधों को गैर आपराधिक कृत्य का दर्जा दिया था। भारतीय दंड संहिता,1860 की धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध दंडनीय अपराध था और इसके लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications