बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच पूरी
नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना के 17 साल बाद आखिरकार लिबरहान आयोग ने प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जांच के हर पक्ष को बारीकी से परखने व निष्पक्ष होकर जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एमएस लिबरहान के नेतृत्व में बनायी गई जांच समिति के कार्यकाल को 48 बार बढ़ाया गया।
आयोग ने मंगलवार को यह जांच रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की उपस्थिति में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी। फिलहाल रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया है।

सबसे लंबा समय लेने वाली समिति
गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के दस दिन के भीतर तत्कालीन सरकार ने लिबरहान समिति का गठन किया था। मस्जिद ढहने के बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसमें भारी संख्या में लोग मारे गये थे। बाबरी प्रकरण व उसके बाद हुए दंगों की जांच के लिए बनायी गई यह समिति सबसे लंबा समय लेने वाली जांच समिति बन गई है। समिति को जांच में 17 साल लगे।
सबसे पहले इस समिति को 16 मार्च 1993 तक जांच पूरी करने के निर्देश मिले थे, लेकिन बार-बार काम अधूरा रहने पर इस समिति के कार्यकाल को 48 बार बढ़ाया गया। अंतिम बार मार्च 2009 में लिबरहान समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया था।
सबसे महंगी जांच
बाबरी मस्जिद प्रकरण की जांच देश में अबतक की सबसे महंगी जांच साबित हुई है। लिबरहान आयोग पर अबतक करीब आठ करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। यह पैसा जांचकर्ताओं के वेतन व अन्य भत्तों के रूप में खर्च हुए।












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