हबीब तनवीर नहीं रहे, अंतिम संस्कार मंगलवार को (राउंडअप)
हबीब तनवीर को अस्थमा की तकलीफ होने पर 11 मई को नेशनल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी तबियत में उतार-चढ़ाव चलता रहा। रविवार को उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई। उनके गुर्दे काम करना बंद कर दिए। सोमवार की सुबह साढ़े छह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
हबीब तनवीर ने कई बेहतरीन नाटक लिखे हैं। आगरा बाजार (1975) और चरणदास चोर (1975) उनमें से प्रमुख हैं। उन्होंने 1959 में भोपाल में नया थिएटर की शुरुआत की थी। उन्हें 1982 में चरणदास चोर के लिए एडिनबर्ग इंटरनेशनल ड्रामा फेस्टिवल में सम्मानित किया गया था।
तनवीर को पद्मश्री, पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया था। वह वर्ष 1972 से 78 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे थे।
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हबीब तनवीर का जनाजा उनके अंसल अपार्टमेंट स्थित आवास से निकलेगा। उन्हें शाम साढ़े पांच बजे बड़ा बाग स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई और दिल्ली से रंगमंच और फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां भोपाल पहुंच रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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