वहनावती बने महान्यायवादी (लीड-1)

राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, "राष्ट्रपति ने वरिष्ठ वकील और पूर्व महाधिवक्ता गुलाम ई. वहनावती को तीन साल के लिए देश का महान्यायवादी नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 8 जून 2009 से प्रभावी मानी जाएगी।"

वहनावती से पूर्व मिलन के. बनर्जी इस पद पर तैनात थे। वहनावती इससे पहले देश के दूसरे सर्वोच्च कानून अधिकारी महाधिवक्ता के पद पर तैनात थे। महाधिवक्ता के रूप में उनका कार्यकाल जून 2004 से जून 2009 तक रहा।

महाधिवक्ता के पद पर रहते हुए वहनावती ने कई अवसरों पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के पक्ष को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखा और उसका बचाव किया। इसमें पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित किए जाने का मामला प्रमुख है।

मुंबई के सेंट जेवियर कालेज से मानव शास्त्र में स्नातक और बंबई विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक वहनावती दिसंबर 1999 से जून 2004 तक महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता पद पर तैनात रहे।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने जिम्बाब्वे में नस्लीय आरोपों की जांच के लिए सितंबर 2004 में वहनावती और जिम्बाव्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्टीवन माजेट को नियुक्त किया था।

वहनावती ने दिसंबर 2005 में दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटरों के खिलाफ नस्लीय आरोपों की भी जांच की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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