मप्र को वस्तु व सेवा कर प्रणाली से भारी राजस्व का नुकसान संभव
भोपाल, 26 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा अमल में लाई जा रही वस्तु तथा सेवा कराधान प्रणाली से मध्य प्रदेश को भारी राजस्व की हानि होने का अनुमान है। इस स्थिति से चिंतित मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से इस प्रणाली से राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभावों का अध्ययन करने के लिए वित्त मंत्रियों की सशक्त समिति बनाने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस नई कर प्रणाली से प्रदेश पर होने वाले नुकसान तथा उसके विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार विमर्श किया गया। बैठक में कहा गया कि राज्य में उत्पादित वनोपज, कपास तथा तिलहन से वर्तमान में 288 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। नई कर प्रणाली से राज्य को इस राजस्व के अधिकांश हिस्से से नुकसान उठाना पड़ेगा।
बैठक में कहा गया कि नई कर प्रणाली के लागू होने के पहले वर्ष 2010-11 में राज्य वैट तथा केन्द्रीय विक्रय कर मद में राज्य सरकार को 800 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा वहीं प्रस्तावित कर प्रणाली से प्राकृतिक संसाधनों तथा औद्योगिक उत्पादन पर करारोपण करने के वैधानिक अधिकार से राज्य को वंचित होना पड़ेगा।
इस वजह से राज्य को लगभग 1000 करोड़ का नुकसान होगा जो निरंतर बढ़ता जाएगा। इस तरह राज्य को 1800 करोड़ तक का नुकसान अनुमानित है। इतना ही नहीं इस कर प्रणाली से वस्तुओं पर देय कर की दर चार से 16 फीसदी हो जाएगी जिससे कीमतों में इजाफा होगा और बोझ आम आदमी को सहना पड़ेगा।
राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि वह वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली प्रभाव का अध्ययन करने के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति बनाए। वित्तीय प्रभावों का अध्ययन किए बगैर नई प्रणाली को अपनाने से भविष्य में अप्रत्याशित वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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