पाकिस्तान का रवैया प्रतिघात करने का : राजनाथ (लीड-1)

नागपुर के रानीकोठी स्थित स्व वेदप्रकाश गोयल परिसर में शुक्रवार को शुरू हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की विदेश नीति खासकर पड़ोसी देश पाकिस्तान के संबंध में सरकार की नीति की जमकर आलोचना की। उन्होंने संप्रग को अतीत की कांग्रेस का ढहता हुआ किला और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को भविष्य के भाजपा नेतृत्व का उगता हुआ सूरज करार दिया।

उन्होंने कहा, "भारत के पड़ोसी देशों में वैसे तो संप्रग सरकार के शासन काल के दौरान उत्तरोत्तर भारत विरोधी वातावरण बनता गया परंतु पाकिस्तान में इस समय जो वातावरण है वह बेहद चिंताजनक है। संप्रग की पूरी की पूरी विदेश नीति की अदूरदर्शिता और अक्षमता को प्रमाणित करती है।"

उन्होंने कहा, "मुंबई हमले को लेकर भारत ने अब तक जो कदम उठाए हैं, उससे आगे जाकर कार्रवाई करनी होगी। इस कड़ी में भारत को सर्वप्रथम आतंकवाद के खिलाफ गठित संयुक्त तंत्र से खुद को अलग कर लेना चाहिए।"

राजनाथ ने कहा, "देश में पहली बार दो चुनाव पूर्व गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला होने जा रहा है। गठबंधन राजनीति में भाजपा एक अग्रदूत बनकर उभरी और भाजपा व राजग के इस निरंतर बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अंतत: कांग्रेस को भी गठबंधन राजनीति का अनुसरण करना पड़ा।"

उन्होंने कहा, "संप्रग अतीत की कांग्रेस का ढहता हुआ किला है तो राजग भविष्य के भाजपा नेतृत्व का उगता हुआ सूरज है।"

राजनाथ ने कहा, "देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लालकिले की प्राचीर से अगले 15 अगस्त को तिरंगा कौन फहराएगा। जनता के रूझान को देखते हुए मैं विश्वास के साथ यह कह सकता हूं कि देश की जनता भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को देखना चाहती है।"

संप्रग सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, "संप्रग में न तो दिशा है न दृष्टि, न विचार है न विवेक। पूरे देश में अराजकता और घोर निराशा का वातावरण निर्मित हुआ है। इस सरकार ने तो अपने ऊट-पटांग निर्णयों से भारत को नए विभाजन की ओर तक धकेलने की कोशिश की। आजादी के बाद भारत ने राजनीतिक चौसर पर वोटों के लिए तुष्टिकरण का ऐसा तांडव पूर्व में कभी नहीं देखा।"

आतंकवाद के मुद़्दे पर संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए राजनाथ ने कहा, "देश आतंकवाद से लड़ना चाहता है। जो देश चार बार पाकिस्तान को शिकस्त दे सकता है उसके सामने आतंकवादी क्या मायने रखते हैं लेकिन जब संप्रग सरकार ही घुटने टेकने वाले निर्णय ले, तो फिर देश का आत्मसम्मान किसके साथ खड़ा होगा।"

उन्होंने ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक संकट के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को खरी-खरी सुनाई और कहा कि सरकार की गलत नीतियों के चलते देश में महंगाई का आतंकवाद मचा हुआ है और आर्थिक संकट का खतरा पैदा हो गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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