मंत्रियों के सवालों से प्रबंधन गुरु हुए अवाक

दरअसल, पंचमढ़ी में चल रही मध्य प्रदेश के मंत्रियों की प्रबंधन और दक्षता संवर्धन के लिए दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन कुए ऐसे ही सवाल सामने आए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र ने जहां मंत्रियों के सामान्य ज्ञान और दिमागी स्तर का आंकलन किया वहीं भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद की पूर्व डीन इंदिरा ज़े पारेख ने प्रबंधन के गुर सिखाए। पारेख ने बदलते दौर में प्रबंधन के महत्व को बताते हुए मंत्रियों को प्रबंधन के जरिए अपनी तथा पार्टी की जड़ें मजबूत बनाने की योजना बताई।

पारेख जब प्रबंधन को राजनीति से जोड़ रही थीं तभी पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव के राजनीति में बढ़ रहे जातिवाद से जुड़े सवाल ने उन्हें निरूत्तरित कर दिया। भार्गव का कहना था कि राजनीति बदल रही है, जाति के आधार पर वोट मांगे और दिए जाने लगे हैं। उनका आशय था कि राजनीति के बदलते रूप में मुकाबला कैसे किया जाए। इसका सीधा जवाब उन्हें नहीं मिल सका।

इसी तरह अफसरों और मंत्रियों के बीच चलने वाली खींचतान का दर्द भी कार्यशाला में सामने आ गया। अफसर के सताए मंत्री प्रबंधन गुरु से पूछ ही बैठे कि अफसरों की मनमर्जी से कैसे निपटा जाए। इसका जवाब मिला मगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से।

मुख्यमंत्री चौहान ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि देश दुनिया में आ रहे बदलाव के बीच इस तरह की कार्यशालाएं काफी मददगार होती हैं, मंत्रियों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आने वाले समय में अफसरों के लिए भी कार्यशालाएं होंगी।

कार्यशाला के पहले दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता वेकैया नायडू ने मंत्रियों को मंत्र दिया कि वे अपनी छवि पर ज्यादा ध्यान दें। इसके अलावा प्रबंधन गुरुओं ने चार घंटे से अधिक समय तक प्रबंधन के लाभ मंत्रियों को गिनाए। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान दौर में सफलता का असली मंत्र सफल प्रबंधन है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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