नेपाल में थारू समुदाय कर रहा आरक्षण का विरोध

काठमांडू, 1 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल सरकार के पिछड़े समुदायों के लिए सभी सरकारी और लोकसेवाओं में 45 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय का स्थानीय थारू समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं। थारू समुदाय ने तराई इलाके में दो दिन के बंद का आवाह्न् किया है।

थारू तराई क्षेत्र के सबसे पुराने निवासी हैं परंतु भारतीय मूल के लोगों और उत्तरी नेपाल के निवासियों ने इनको दासों की श्रेणी में ला दिया।

नेपाल सरकार के कोटा घोषित करने के खिलाफ थारू समुदाय ने सात और आठ फरवरी को तराई बंद का आवाह्न् किया है।

थारू कल्याण करनी सभा के नेतृत्व में समुदाय के लोगों ने अंतरिम संसद के सामने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' का पुतला भी जलाया। उन्होंने पूरे तराई इलाके में रैलियों का आयोजन भी किया है।

थारू समुदाय खुद को मधेशी समुदाय के साथ रखने का विरोध कर रहा है। सभा के अध्यक्ष राजकुमार लेखी ने सरकार के इस निर्णय की आलोचना की।

भारतीय मूल का मधेशी समुदाय नेपाल का सबसे उपेक्षित समुदाय है। लेखी ने कहा कि 45 प्रतिशत की आरक्षण व्यवस्था से उनके समुदाय के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की मांग की।

जनगणना के अनुसार 2.9 करोड़ की आबादी में 16 लाख थारू समुदाय के लोग हैं। लेखी का कहना है कि जनगणना से काफी अधिक थारूओं को बाहर रखा गया है। समुदाय की आबादी करीब 30 लाख के करीब है।

नेपाल में कागजों पर गुलामी खत्म होने के बावजूद कई थारू अभी भी वास्तव में गुलामों का जीवन जी रहे हैं। नेपाल के एक विद्वान के अनुसार गौतम बुद्ध के पिता शुद्वोधन एक थारू राजा थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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