ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

रिज़र्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान महँगाई दर गिर कर तीन फ़ीसदी या इससे भी नीचे आ जाने की संभावना जताई है.
देश की वित्तीय व्यवस्था को सामान्य बताया गया है लेकिन ये कहा गया है कि आर्थिक माहौल में नरमी का रुख़ है.
रिज़र्व बैंक के चेयरमैन डी सुब्बाराव कहना है कि इस वर्ष आर्थिक विकास दर गिर कर सात फ़ीसदी के आस-पास रहने की संभावना है.
रिज़र्व बैंक के अनुसार मंदी के बावजूद बैंकों से मिलने वाले कर्ज में लगभग बीस फ़ीसदी की वृद्धि होने की संभावना है.
ब्याज दर जस के तस
सुब्बाराव ने कहा है कि रिज़र्व बैंक ने म्युचुअल फंडों, ग़ैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियों को नकदी उपलब्ध कराने के लिए कई उपाय किए हैं.
इसके तहत सितंबर तक के लिए एक निश्चित अनुपात में नकदी रखने की सीमा में छूट दी गई है. पहले ये सीमा जून तक के लिए ही थी.
मुख्य दरें सीआरआर - 5 प्रतिशत रेपो रेट - 5.5 प्रतिशत रिवर्स रेपो रेट- 4 प्रतिशत जीडीपी अनुमान- 7 प्रतिशत
बैंक ने उम्मीद जताया है कि इससे बाज़ार में नकदी की कमी नहीं होगी.
इसे आधार बनाते हुए इस बार ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है.
रेपो दर साढ़े पाँच फ़ीसदी और रिवर्स रेपो दर चार फ़ीसदी पर स्थिर रहेगी. नकद आरक्षी अनुपात पाँच फ़ीसदी है.
रेपो दर उस दर को कहते हैं जिस पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को छोटी अवधि के लिए कर्ज देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट ठीक इसके विपरीत है.
जब वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक में जमा रखते हैं तो उस पर उन्हें जो ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.
रिजर्व बैंक ने कहा है कि फिलहाल इन दरों में कटौती की कोई ज़रूरत नहीं है लेकिन वो स्थितियों पर लगातार निगाह रखेगा.












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