बिहार में हड़ताली कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं
दो दिनों के सरकारी अवकाश के बाद मंगलवार को भी हड़ताल के कारण राज्य के सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति नहीं के बराबर रही। सचिवालय से लेकर प्रखंड कार्यालय तक में सरकारी कार्य लगभग ठप पड़े हुए हैं। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है।
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने मंगलवार को हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के सरकारी आदेश की निंदा करते हुए आईएएनएस को बताया कि सरकार से निराश हो चुके कर्मचारी अब अपनी मांगों को लेकर जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिहार में एक फरवरी से पांच फरवरी तक चलाए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान में भी हड़ताली कर्मचारियों द्वारा सहयोग नहीं देने पर विचार किया जा रहा है।
उधर, बिहार सचिवालय सेवा संघ अध्यक्ष नीलम कपूर का दावा है कि सरकार की दमनकारी कार्रवाई के बावजूद सचिवालय से लेकर प्रखंड कार्यालय के कर्मचारी इस लड़ाई में डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कर्मचारियों की कमी होने के कारण पांच कर्मचारियों का कार्य एक कर्मचारी से कराया जाता है परंतु इसकी एवज में उन्हें अलग से कोई राशि नहीं दी जाती।
हड़ताल के कारण बदहाल हुई राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर हुई है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला अधीक्षकों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने वाले हड़ताली कर्मचारियों के साथ सख्ती से पेश आए तथा मरीजों को इलाज से वंचित रखने वाले हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) नीलमणि ने मंगलवार को बताया कि सभी पुलिस अधीक्षकों से हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवा पर पड़े प्रभाव की रिपेार्ट भी मांगी गई है।
उल्लेखनीय है कि छठे वेतनमान की सिफारिशों को केन्द्र सरकार की तर्ज पर लागू करने की मुख्य मांग को लेकर राज्यभर के अधिकांश कर्मचारी सात जनवरी से ही हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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