उच्च न्यायालय का ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों को जमीन दिखाने का आदेश

नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने ओंकारेश्वर परियोजना के कारण प्रभावित हो रहे परिवारों के विषय में उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर कर रखी है। इस याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ए.क़े पटनायक और न्यायाधीश अजीत सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को राज्य सरकार को बांध प्रभावितों को प्रस्तावित जमीन दिखाने का आदेश दिया। न्यायालय ने प्रभावितों को जमीन दिखाने तथा गांव वालों से तहकीकात कराने के बाद 15 फरवरी तक इन जमीनों के विषय में शपथ पत्र प्रस्तुत करने को भी कहा है।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के 21 फरवरी 2008 और सर्वोच्च न्यायालय के 15 मई 2008 के आदेशों के बाद पहली बार ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों को कृषि जमीन देने का प्रस्ताव किया गया। नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने न्यायालय को बताया था कि प्रस्तावित जमीन चरनोई की है और कृषि योग्य नहीं है। इसी के आधार पर न्यायालय ने प्रभावितों को पहले जमीन दिखाने का आदेश दिया है।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन के आलोक अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया है कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश भी दिया है। इसमें शिकायत निवारण प्राधिकरण से कहा गया है कि वह प्रभावितों के प्रकरणों की सुनवाई करते समय पुनर्वास नीति के अनुसार ही फैसले लें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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