....नहीं तो पिटाई की जाएगी

....नहीं तो पिटाई की जाएगी

जी हां, कोलकाता के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एसएसकेएम में ऐसा ही एक बोर्ड लगा है. इससे वहाँ जाने वाले मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों के अलावा डॉक्टरों का एक तबका ख़ासा नाराज़ है.

लेकिन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का दावा है कि तमाम उपाय नाकाम होने की वजह से ही उन्होंने ऐसा बोर्ड लगाया है और इसका ख़ासा असर हुआ है.

मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों को अस्पताल परिसर में जगह-जगह थूकने से रोकने के लिए बीते सप्ताह ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. किसी सरकारी अस्पताल ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है. अशोक कुमार घोष, अस्पताल के अधीक्षक

मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों को अस्पताल परिसर में जगह-जगह थूकने से रोकने के लिए बीते सप्ताह ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. किसी सरकारी अस्पताल ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है.

हिंदी, अंग्रेज़ी और बांग्ला में लिखे गए ऐसे पोस्टर अस्पताल के 'स्कूल ऑफ़ डाइजेस्टिव एंड लिवर डिज़ीज़' विभाग में लगाए गए हैं.

अस्पताल के अधीक्षक अशोक कुमार घोष कहते हैं, "मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों को अस्पताल परिसर में जगह-जगह थूकने से रोकने के लिए बीते सप्ताह ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. किसी सरकारी अस्पताल ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है."

वे कहते हैं, "इस अस्पताल में आने वाले ज़्यादातर मरीज़ ग्रामीण इलाक़ों और पिछड़े तबके के होते हैं. उनको पान और खैनी खाकर जहां-तहां थूकने की आदत होती है. नतीजतन अस्पताल परिसर में हमेशा गंदगी फैली रहती है."

'बिन भय होई न प्रीत...' अस्पताल में लोग सफाई पर ध्यान नहीं देते हैं

घोष बताते हैं कि अस्पताल ने तमाम उपाय नाकाम रहने के बाद थक-हार कर 'बिन भय होई न प्रीत...' को अपनाते हुए ऐसे पोस्टर लगाने का फ़ैसला किया.

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों को समझना चाहिए कि ऐसा उनके भले के लिए ही किया गया है.

डॉक्टरों के एक तबके के अलावा मरीज़ों में भी पोस्टर में इस्तेमाल की गई भाषा से काफ़ी नाराजगी है.

मेदिनीपुर से आए मोहम्मद शेख कहते हैं, "पोस्टर की भाषा संयत होनी चाहिए थी. जब तक लोग नहीं बदलना चाहें, इन पोस्टरों से थूकने की आदत नहीं बदलेगी."

लेकिन अस्पताल अधीक्षक कहते हैं कि यह महज़ चेतावनी है ताकि लोग थूकने से पहले सोचें.

वे कहते हैं, "हम किसी मरीज़ की पिटाई नहीं करेंगे. कोई अस्पताल ऐसा नहीं कर सकता. सिर्फ 'कृपया यहां नहीं थूकें' लिखने पर कोई ऐसे पोस्टरों की परवाह नहीं करता."

हम किसी मरीज़ की पिटाई नहीं करेंगे. कोई अस्पताल ऐसा नहीं कर सकता. सिर्फ 'कृपया यहां नहीं थूकें' लिखने पर कोई ऐसे पोस्टरों की परवाह नहीं करता अशोक कुमार घोष

हम किसी मरीज़ की पिटाई नहीं करेंगे. कोई अस्पताल ऐसा नहीं कर सकता. सिर्फ 'कृपया यहां नहीं थूकें' लिखने पर कोई ऐसे पोस्टरों की परवाह नहीं करता

इन पोस्टरों का खासा असर पड़ा है. अस्पताल के स्कूल ऑफ़ डाइजेस्टिव एंड लिवर डिज़ीज़ के गेट पर लगे पोस्टर का ही असर है कि अब उस विभाग में कोई भी पान या पान मसाला चबाता नहीं नज़र आता.

पोस्टर पर नज़र पड़ते ही लोग उसे भीतर गटक लेते हैं. अब उस परिसर में सिगरेट पीने वालों के लिए भी ऐसा ही एक पोस्टर लगाने पर विचार हो रहा है.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+