गज़ा अपील प्रसारित नहीं करने पर विवाद

हालांकि इस फ़ैसले को लेकर बीबीसी को काफ़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. ब्रितानी सरकार के मंत्रियों, चैरिटी संस्थाओं से जुड़े लोग और कई दर्शकों ने बीबीसी के फ़ैसले का विरोध किया है.
डिज़ास्टर्स इमरजेंसी कमेटी यानी डीईसी उन राहत एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करती है जो ग़ज़ा में इसराइली अभियान के बाद खाद्य सामग्री, दवा और कंबल खरदीने के लिए धनराशि इकट्ठा कर रही है.
बीबीसी के महानिदेशक मार्क टॉमसन ने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अपील प्रसारित करने से निष्पक्षता की बीबीसी की नीति पर असर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि डीईसी स्वीकार करती है कि निष्पक्षता के आधार पर उनकी अपील प्रसारित करने से मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
अपील का विरोध
मार्क टॉमसन ने इस आरोप से इनकार किया है कि इसराइली समर्थक लॉबी के लोग उनके फ़ैसले को प्रभावित कर रहे हैं.
वहीं ब्रितानी चैनल स्काई न्यूज़ ने कहा है कि आपदा आपात समिति की अपील प्रसारित करना चैनल के मूल उद्देशयों से मेल नहीं खाता.
ब्रिटेन में करीब 60 सांसदों ने कहा है कि वे उस संसदीय प्रस्ताव का समर्थन करेंगे जिसमें बीबीसी और स्काई न्यूज़ से अपील प्रसारित करने के लिए कहा जाएगा.
स्काई न्यूज़ पिछले कुछ दिनों से इस मसले पर विचार कर रहा था और सोमवार को ही उसने अपील का प्रसारण न करने का फ़ैसला किया. हालांकि ब्रिटेन के चैनलों आईटीवी, चैनल फ़ोर और फ़ाइव इसे प्रसारित कर रहे हैं.
ब्रिटेन के सांसद रिचर्ड बर्डन ने बीबीसी और स्काई न्यूज़ के फ़ैसले से नाराज़गी जताते हुए कहा, "ये मानवीय आधार पर की गई अपील है जिससे कई प्रतिष्ठित राहत संस्थाएँ जुड़ी हैं. अगर बीबीसी निष्पक्षता को बरकरार रखना चाहती है तो उन्हें बिना डरे या किसी का पक्ष लिए फ़ैसला लेना चाहिए. कॉंगो या दारफ़ुर के बच्चों और ग़ज़ा के बच्चों के साथ एक समान बर्ताव होना चाहिए."
चर्च ऑफ़ इंग्लैंड भी बीबीसी के फ़ैसले का विरोध कर रहा है. आर्चबिशप ऑफ़ यॉर्क ने कहा कि बीबीसी को मानवीयता के ज़ज़्बे को प्रमुखता देनी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी का कहना है कि ग़ज़ा में मदद की बहुत ज़रूरत है.












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