मनमोहन की बाइपास सर्जरी सफल

सुबह 7.45 से शुरु हुई सर्जरी लगभग 11 घंटों तक चली और रात 8.55 को उन्हें ऑपरेशन थिएटर से निकालकर सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में पहुँचा दिया गया है.
डॉक्टरों का कहना है कि प्रधानमंत्री होश में हैं और ऑपरेशन के बाद कोई समस्या नज़र नहीं आ रही है.
उल्लेखनीय है कि गत 21 जनवरी को उनकी जाँच के बाद पता चला था कि उनके हृदय की कुछ धमनियों में रुकावट है और इसके लिए उनकी दोबारा बाइपास सर्जरी करनी पड़ेगी.
इससे पहले 1990 में ब्रिटेन में उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी और फिर 2004 में दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी.
सात-आठ दिन अस्पताल में रहेंगे
76 वर्षीय प्रधानमंत्री मनमोहन के दिल की बाइपास सर्जरी शनिवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में की गई.
उनकी बाइपास ग्राफ़्ट सर्जरी दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल और मुंबई स्थित एशियन हार्ट संस्थान के डॉक्टरों की एक टीम ने की है.
यह पूरा ऑपरेशन एम्स के कार्डिएक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ संपत कुमार के निर्देशन में पूरा हुआ.
एशियन हार्ट संस्थान के जाने-माने कार्डिएक सर्जन डॉक्टर रमाकांत पांडा के नेतृत्व में सर्जरी की गई है.
मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में प्रणब मुखर्जी उनके पारंपरिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं
इन दोनों वरिष्ठ डॉक्टरों के अलावा इस टीम में कुल नौ डॉक्टर थे जिसमें प्रधानमंत्री के निजी चिकित्सक नीतीश नायक शामिल थे.
सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने कहा है कि अगले तीन दिन तक प्रधानमंत्री को आईसीयू में रखा जाएगा और इसके बाद वे चार-पाँच दिन और अस्पताल में ही रहेंगे.
डॉक्टरों का कहना है कि वे अगले दो हफ़्तों में थोड़ा बहुत काम करने की स्थिति में आ जाएँगे और चार हफ़्तों बाद वे दफ़्तर के सामान्य कामकाज करने लगेंगे.
उनका कहना है कि अगले छह हफ़्तों में प्रधानमंत्री पहले की तरह पूरी उर्जा के साथ और पहले से ज़्यादा अच्छे स्वास्थ्य के साथ काम कर सकेंगे.
दूसरी बाइपास सर्जरी
डॉक्टर पांडा का कहना है कि प्रधानमंत्री के हृदय में कुल पाँच बाइपास सर्जरी की गई है.
उनका कहना है कि 19 साल पहले बाइपास सर्जरी में जो ग्राफ़्ट लगाया गया था और एंजियोप्लास्टी के बाद जो स्टेंट लगाया गया था, उनमें भी समस्या आ गई थी और धमनियों में कई जगह रुकावटें थीं.
सर्जरी का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि धमनियों में चार बाइपास किए गए हैं और एक बाइपास शिरा में किया गया है.
इसके लिए ग्राफ़्ट सीने से, बाएँ हाथ से और बाएँ पैर से लिए गए हैं.
उनका कहना था कि चूंकि प्रधानमंत्री को मधुमेह है इसलिए सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद बाइपास सर्जरी को ही प्राथमिकता दी गई.
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि सर्जरी के दौरान किसी तरह की समस्या आई. उनका कहना था कि दूसरी बाइपास सर्जरी में अमूमन ज़्यादा समय ही लगता है और इस मामले में भी यही बात थी.
डॉक्टरों का कहना है कि इस ऑपरेशन के बाद प्रधानमंत्री सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेंगे और पहले की तरह की सक्रिय रह सकेंगे.
राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति
प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति की अध्यक्षता करते हैं और अब भी ऐसा ही होगा. उन्हें वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है जिसे मनमोहन सिंह ख़ुद देख रहे थे.
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में स्टैंडिंग ऑर्डर यानी निर्देश स्पष्ट है. ऐसी स्थिति में अहम फ़ैसले राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति करती है जिसकी अध्यक्षता सबसे वरिष्ठ मंत्री करता है. इन परिस्थितियों में इस समिति की बैठकों की अध्यक्षता मैं करुँगा."
इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गणतंत्र दिवस के परेड कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएँगे.
इसलिए इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री का पारंपरिक कर्तव्य अलग-अलग लोग निभाएँगे.












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