6-10 उम्र के 70 फीसदी बच्चे विद्यालय से दूर
स्वयंसेवी संगठन 'हक: सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स' की रिपोर्ट 'स्टिल आउट ऑफ फोकस स्टेट्स ऑफ चिल्ड्रेन इन इंडिया-2008' यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2007 तक हर बच्चे को स्कूल में दाखिल कराने का लक्ष्य तय करने के बावजूद खुद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार आज भी 76 लाख बच्चे स्कूलों से दूर हैं।
संगठन का कहना है कि सर्व शिक्षा की लक्ष्य अवधि को लगातार पीछे धकेला जा रहा है और अब लगता है कि 2015 का लक्ष्य भी पहुंच से दूर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या कम होती है। विद्यालय न जाने वाले बच्चों की संख्या मुस्लिम समुदाय में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक 10 मुस्लिम बच्चों में से एक बच्चा स्कूल से बाहर है। ग्रामीण इलाकों में स्कूल न जाने वाले बच्चों का अनुपात शहरी इलाकों के मुकाबले दोगुना है।
रिपोर्ट में हिंसक हालतों में पलते बच्चों के बारे में कहा गया है कि वर्ष 2005 से 2006 के बीच बच्चों के विरूद्ध होने वाले दर्जशुदा अपराधों में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में बच्चों को हिंसा का औजार बनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों, खासकर लड़कियों पर अपहरण का सबसे अधिक खतरा रहता है। 15-18 साल की उम्र के बच्चों और 10 साल से कम उम्र की लड़कियों की हत्या की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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