श्रीलंका में लड़ाई, संपादक पर हमला

उधर राजधानी कोलंबो में एक समाचार पत्र के संपादक और उनकी बीवी पर हमले की भी ख़बरें आ रही हैं.
तमिल विद्रोही समर्थित एक वेबसाइट का कहना है कि विद्रोहियों ने मुल्लईटिवू ज़िले में 40 सुरक्षाबलों को संघर्ष में मार दिया है और सेना मोर्चे से पीछे हटने को मजबूर हुई है.
पर तमिल विद्रोहियों के इस दावे को सेना ने ग़लत बताया है. सेना के एक प्रवक्ता ने विद्रोहियों के इन दावों से इनकार किया है.
जिन इलाकों में तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है वहाँ पत्रकारों के जाने पर पाबंदी है इसलिए सेना या विद्रोहियों के दावों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की जा सकती है.
श्रीलंका में इन दिनों सेना और स्वायत्तता की मांग कर रहे तमिल विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ा हुआ है. ताज़ा सशस्त्र अभियान में तमिल विद्रोहियों को काफी नुकसान भी हुआ है.
इस बीच अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी (आईसीआरसी) ने बताया है कि उन्होंने 11 तमिल लड़ाकों के शव एलटीटीई को सौंप दिए हैं.
आईसीआरसी मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है और दोनों तरफ़ से शवों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करता है.
संपादक पर हमला
उधर कोलंबो में साप्ताहिक समाचार पत्र 'रिविरा' के संपादक और उनकी बीवी पर हमला किया गया है. पिछेल दो हफ़्तों में मीडियाकर्मियों पर यह दूसरा हमला है.
साप्ताहिक रिविरा के पत्रकारों का कहना है कि मोटरसाइकल पर सवार चार अज्ञात लोगों ने संपादक उपाली टेन्नाकून की कार को रोका और दंपत्ति पर लोहे की सरियों और दूसरे हथियारों से हमला किया.
हमले के कारण इन दोनों की हालत स्थिर बनी हुई है. मीडिया अधिकार समूहों का कहना है कि श्रीलंका में लगातार मीडियाकर्मी इस तरह के हमलों या हिंसा का निशाना बनते आ रहे हैं.
दो सप्ताह पहले ही 'संडे लीडर' नाम के एक समाचार पत्र के संपादक लासांता विक्रमतुंगा को अज्ञात लोगों ने गोली मारी दी थी.
उल्लेखनीय है कि लगभग ढाई दशक से तमाल विद्रोही अलग राष्ट्र की मांग को लेकर सशस्त्र लड़ाई लड़ रहे हैं, इस संघर्ष में दोनों पक्षों के कम से कम 70 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.












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