बांग्लादेश में हुए आतंकवादी हमलों की नए सिरे से जांच होगी
समाचार पत्र 'डेली स्टार' के अनुसार इन हमलों की फेहरिस्त में हसीना पर किया गया जानलेवा हमला भी शामिल है।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री और हसीना की कट्टर राजनीतिक विरोधी खालिदा जिया के कार्यकाल वर्ष 2001 से 2006 के दौरान कई हमले हुए थे। इन हमलों को अंजाम देने वालों को कथित तौर पर खालिदा के मंत्रियों और सांसदों की शह मिली हुई थी।
आम धारणा है कि अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद इस्लामी संगठनों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की घटनाओं में वृद्धि हुई। खालिदा सरकार ने ऐसे संगठनों का अस्तित्व होने से इंकार किया था लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बाद उनमें से कुछ पर प्रतिबंध लगाया गया।
21 अगस्त 2004 को ढाका में हुई एक रैली में करीब की मस्जिद से ग्रेनेड फेंके जाने की वजह से अवामी लीग के 21 नेता और कार्यकर्ता मारे गए थे। अगस्त 2005 में बांग्लादेश में 500 विस्फोट हुए।
कैबिनेट की सोमवार को हुई बैठक में हसीना ने आतंकवाद निरोधक कार्यबल बनाने और क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद पर सिर्फ अपने बूते काबू पाना संभव नहीं है इसके लिए साझा प्रयासों की जरूरत होगी।"
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के आगामी बांग्लादेश दौरे में भी आतंकवाद का मसला छाये रहने की संभावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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