पाकिस्तानी संविधान में संशोधन पर मिश्रित संकेत
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) व मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) जैसी पार्टियों से प्राप्त चार मसौदों पर कोई सहमति बनाने के लिए जरदारी व गिलानी ने शनिवार को मुलाकात की।
इन मसौदों में 17वें संशोधन को निरस्त करने की मांग की गई है। यह संशोधन राष्ट्रपति को केंद्र सरकार व प्रांतीय विधानसभाओं को भंग करने का अधिकार प्रदान करता है।
लेकिन सहमति की बात करना आसान है और सहमति बनाना कठिन है।
क्योंकि जरदारी की सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन के बीच तीखे मतभेद हैं।
ये मतभेद सर्वोच्च न्यायालय के 19 न्यायाधीशों को लेकर हैं, जिन्हें नवंबर 2007 में आपातकाल लागू करने के बाद सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ ने पद मुक्त कर दिया था।
फरवरी 2008 में चुनाव के बाद जब पीपीपी ने पीएमएल-एन के साथ गठबंधन किया था तो पीपीपी, न्यायाधीशों की बहाली पर राजी थी। लेकिन बाद में पीपीपी अपनी बात से पीछे हट गई और पीएमएल-एन ने भी गठबंधन से अपने को अलग कर लिया।
दूसरी ओर अब जरदारी की मंशा यह है कि राष्ट्रपति के अधिकारों को प्रधानमंत्री कार्यालय स्थानांतरित कर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर खुद कब्जा कर लिया जाए।
प्रधानमंत्री गिलानी, राष्ट्रपति जरदारी की इस मंशा को अच्छी तरह समझ रहे हैं।
इस मामले का सारा पेंच इसी सत्ता संघर्ष के बीच उलझा हुआ है। आगे क्या होता है, अभी से कुछ कह पाना कठिन है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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