'बिन मांगी सलाह' की ज़रुरत नहीं है

विदेश मंत्री मिलिबैंड ने गार्डियन अख़बार में अपने लेख में जम्मू कश्मीर पर भी अपने विचार रखे थे. इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा, '' मिलिबैंड को अपने विचार रखने का हक है जो उनके अपने हैं. भारत एक स्वतंत्र देश है और अगर हम उनके विचारों से इतेफ़ाक न रखें तो भी उन्हें ये विचार रखने का अधिकार है. ''
प्रवक्ता ने इसके बाद साफ़ कहा, '' हां लेकिन इतना ज़रुर है कि हमें भारत के अंदरुनी मसलों जैसे जम्मू और कश्मीर पर बिन मांगी सलाह की ज़रुरत नहीं है.''
मिलिबैंड ने अपने लेख में कहा था कि देशों के सहयोग से ही आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है.
उन्होंने भारत और पाकिस्तान का हवाला देते हुए कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान मिलकर काम करें और कश्मीर के मामले का समाधान खोजें तो क्षेत्र में लोगों को हथियारबंद करने का कोई मौका नहीं मिल सकेगा और पाकिस्तान भी अपनी पश्चिमी सीमा की सुरक्षा बेहतर ढंग से करेगा.
ऐसा माना जाता है कि मिलिबैंड का यह बयान कश्मीर और आतंकवाद को जोड़ता है जो भारत को पसंद नहीं और इसलिए भारत ने ऐसी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.












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