लखनऊ उच्च न्यायालय ने दिया मायावती सरकार को झटका
उधर राज्य सरकार उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल देवेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ में पत्रकारों को बताया कि इस फैसले के खिलाफ हम उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे।
ज्ञात हो कि मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र कर रहे थे।
इस कमेटी की सिफारिश के आधार पर मायावती सरकार ने 18,000 से पुलिस कर्मियों को बर्खास्त और 34 आईपीएस अफसरों को निलंबित कर दिया गया था।
राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय की शरण लेने वाले निलंबित आईपीएस अफसर ब्रजभूषण बक्शी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायामूर्ति ए.एन.वर्मा और न्यायमूर्ति एस.एन शुक्ला ने भर्ती घोटाले की जांच करने वाली कमेटी के प्रमुख आईपीएस अफसर शैलजाकांत मिश्रा का कमेटी में होना अनुचित बताते हुए कहा कि शैलजाकांत मिश्रा पुलिस भर्ती के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक(स्टैबलिशमेंट) थे।
न्यायालय ने कहा कि जब शैलजाकांत खुद उस भर्ती प्रकिया का हिस्सा थे तो उन्हें जांच कमेटी का प्रमुख बनाया जाना उचित नहीं था। न्यायालय ने कमेटी को रद्द करने का आदेश दिया है।
इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 8 दिसंबर,2008 को बर्खास्त सिपाहियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को उन्हें बहाल करना का आदेश दिया था। न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ही विशेष अपील दायर की थी, जिस पर अभी फैसला आना बाकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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