मलेरिया की नई कारगर दवा को एफडीए से मिलेगी हरी झंडी
इस दवा को अफ्रीका और एशिया में मलेरिया संक्रमण से निपटने में कारगर माना गया है। यूं तो अमेरिका में सालाना महज 1500 मलेरिया मामले ही प्रकाश में आते हैं, पर इसका प्रकोप पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एफडीए द्वारा प्रमाणित यह दवा सेना के जवानों और विदेश जाने वाले अमेरिकियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
अमेरिका के लिए यह भले ही मामूली रोग रह गया है, पर शेष दुनिया में हर साल यह बीमारी 20 लाख लोगों की जान लेती है, जबकि दो से तीन अरब लोग हर साल इससे प्रभावित होते हैं। कोएरटम नामक यह दवा स्विस कंपनी नोवार्टिस ने विकसित की है। इसमें आर्टेमिसिनिन के अलावा लुमफैंट्रिन नामक रासायनिक तत्व भी है।
यह दवा शरीर में स्थित खतरनाक परजीवियों को तुरंत खत्म नहीं करती, लेकिन रक्त में इसका असर लंबे समय तक रहता है। पेनसिल्वानिया विश्वविद्यालय के औषधि विशेषज्ञ डोरोन ग्रीनबॉम ने कहा कि यह दवा मलेरिया से लड़ने की क्षमता में इजाफा करती है। उनके मुताबिक कई मौजूदा दवाओं का असर घटने से मलेरिया के खिलाफ मुहिम के नतीजों को लेकर चिंता जताई जाने लगी है। यह दवा उम्मीद की नई किरण साबित हो सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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