खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय कर्मचारियों ने गिनाई अपनी मुश्किलें
सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों ने भारतीय प्रवासी अधिकारियों व विदेशों में भारतीय दूतावास अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की। इसके साथ ही बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की सुविधा न होने व जेल में बंद श्रमिकों को कानूनी मदद न मिल पाने की भी शिकायत की गई।
सातवें प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन में, खाड़ी देशों में भारतीयों की समस्याओं पर आयोजित एक सत्र में हिस्सा लेते हुए एक प्रतिनिधि ने कहा, "मैंने एक प्रवासी अधिकारी को दो श्रमिकों के मुंह पर पासपोर्ट फेंकते देखा।"
बहरीन के 'गल्फ डेली न्यूज' के संयुक्त संपादक सोमन बाबी के अनुसार जिस तरह से खाड़ी देशों से श्रमिकों की वापसी हो रही है, उसके अनुसार वहां से श्रमिकों द्वारा भेजी जाने वाली पूंजी में भारी गिरावट आएगी।
बाबी ने खाड़ी देशों से लौटने वाले श्रमिकों के लिए एक पुनर्व्यवस्थापन विभाग स्थापित करने की रवि से मांग की।
बाबी ने कहा, "अर्थव्यवस्था में गिरावट के कारण कई परियोजनाएं रुक गई हैं। ऐसे में लौट रहे क्षमतावान श्रमिकों के इस्तेमाल के लिए भारत को सक्षम होना चाहिए।"
ओमान में भवान इंजीनियरिंग समूह के प्रबंध निदेशक एस.के. वीरमानी ने भारतीय कपड़ा उद्योग से ओमान में कारखानें लगाने व मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का लाभ उठाने का सुझाव दिया।
ज्ञात हो कि अमेरिका व ओमान के बीच मुक्त व्यापार का समझौता हुआ है।
खाड़ी देशों में जेल में बंद भारतीय श्रमिकों के सवाल पर वयालार रवि ने कहा, "हमारे पास जेल में बंद भारतीय श्रमिकों का ब्योरा उपलब्ध नहीं है। यदि ऐसे श्रमिकों के बारे में हमें जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो हम तत्काल कार्रवाई करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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