अध्ययन ने जगाई मरीज़ों में आशा

अत्यधिक विपरीत अवस्था में शरीर की प्रतिक्रिया का अध्ययन करने एवरेस्ट पर गई टीम ने पता लगाया कि वहाँ ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा सबसे कम थी.
अध्ययन के नतीजों ने ऐसे मरीज़ों के इलाज की संभावना जगा दी है जिनके ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा काफ़ी कम होती है.
'क्यूडवेल एक्स्ट्रीम एवरेस्ट' के नाम से किया गया यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है.
अधिक ऊँचाई पर चढ़ने वाले लोगों के ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी कम पाया जाता है, जबकी मैदानी इलाक़ों में यह स्तर उन लोगों में पाया जाता है जो मौत के क़रीब होते हैं.
कम ऑक्सीजन
पहाड़ी पर चढ़ाई करने वाले लोगों के ख़ून में ऑक्सीजन की औसत मात्रा 3.28 किलो पास्कल या केपीए थी जबकि निम्नतम मात्रा 2.55 केपीए थी.
वहीं एक सामान्य इंसान में यह 12 से 14 केपीए के बीच में होती है. जिनके ख़ून में 8 केपीए से कम ऑक्सीजन होता है उन्हें गंभीर रूप से बीमार माना जाता है.
इस अध्ययन यात्रा के प्रमुख डॉक्टर माइक ग्रोकॉट ने कहा, "हम अपने मरीजों में 6 केपीए से कम का स्तर बहुत कम ही देखते हैं."
उन्होंने कहा, "अब तक हमारे ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर इससे कम बना हुआ था और हम सामान्य रूप से टहल रहे थे, बात कर रहे थे और अन्य काम कर रहे थे."
डॉक्टर ग्रोकॉट ने कहा कि इससे हमें सोचने कि दिशा मिली है कि लोग किस स्तर तक ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा सह सकते हैं.
उन्होंने कहा कि कुछ गंभीर मरीज ख़ून में ऑक्सीजन की कम मात्रा के साथ भी रह सकते हैं और उन्हें तत्काल ऑक्सीजन देने की ज़रूरत नहीं रहेगी, जो ख़ून में ऑक्सीजन का सामान्य स्तर बनाए रखने के लिए दिया जाता है. इसमें नुक़सान होने का ख़तरा भी होता है.












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